जाति जनगणना पर पिछलीं सरकारें रहीं 'सुस्त', मोदी सरकार ने बढ़ाया कदम, विपक्ष से छीन लिया बड़ा मुद्दा

Caste Census : बीते दशकों में कई सरकारें आईं और गईं। पिछड़ी जातियों की राजनीति करने वाले दलों ने इस दौरान भी जाति जनगणना कराने की मांग की और दबाव बनाया लेकिन सरकारें कोई न कोई वजह गिनाकर इसे ठंडे बस्ते में डालती रहीं। किसी भी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान पूर्ण रूप से जातिगत गणना कराने का जोखिम नहीं उठाया।

Caste Census : कल तक जाति जनगणना कराने की विपक्ष की मांग पर आना-कानी और ढुलमुल रवैया अख्तियार करने वाली मोदी सरकार के सुर 30 अप्रैल को अचानक से बदल गए। उसने जाति जनगणना कराने का ऐलान कर दिया। हालांकि उसने यह नहीं बताया कि वह इसे कब कराने जा रही है। सरकार के अचानक लिए गए इस फैसले से कांग्रेस राजद सपा सहित विपक्ष के वे सभी दल भौचक्के रह गए जो इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर ओबीसी को अपनी तरफ खींचने और भाजपा को घेरने में जुटे थे। जाहिर है कि जाति आधारित जनगणना के अपने फैसले से मोदी सरकार ने विपक्ष के हाथ से राजनीतिक का एक बड़ा मुद्दा छीन लिया है। इसकी घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह कहना नहीं भूले कि कुछ राज्यों द्वारा कराए गए जातिगत सर्वे पारदर्शी नहीं हैं। जाहिर है उनका इशारा बिहार, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों की तरफ था।

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जाति जनगणना कराएगी मोदी सरकार।

फैसले के बाद श्रेय लेने की विपक्ष में मच गई होड़

विपक्ष के सभी दलों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। जाति जनणना की मांग पर सबसे ज्यादा मुखर रहने वाली पार्टियां चाहे वह कांग्रेस हो राजद हो या सपा सभी में इसका श्रेय लेने की होड़ मची है। सभी ने यही कहा कि वे लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। माना जाता है कि देश की आबादी में बावन फीसदी लोग पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति के हैं। ओबीसी समुदाय के नेताओं का मानना है कि इस हिसाब से राजनीति में उनकी हिस्सेदारी बहुत कम है। राजद जैसे दल 'जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी' के आधार पर आरक्षण चाहते हैं। कांग्रेस आरक्षण को पचास फीसदी से ऊपर ले जाना चाहती है। यह सब सभी जातियों का जातिगत डाटा सामने आने पर ही संभव है। बहरहाल, जाति जनगणना कराने पर जो एक ऊहापोह की जो स्थिति बनी हुई थी वह अब समाप्त हो गई है। आजादी के बाद जाति आधारित जनगणना की यह घोषणा कैसे यहां तक पहुंची इसे भी यहां जानना जरूरी है।

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