पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने सिंधु नदी जल समझौता सस्पेंड करने का ऐलान किया तो बदले में पाकिस्तान ने शिमला शांति समझौते को सस्पेंड करने का ऐलान कर दिया। शिमला समझौते के स्थगित होने पर अब सवाल ये है कि क्या सच में भारत को इससे कोई फर्क पड़ेगा, या भारत को शिमला समझौते के रद्द होने से फायदा ही फायदा होगा? इतना तो स्पष्ट है कि सिंधु नदी का पानी रोकने पर पाकिस्तान की हालत खराब होगी, खेत, बंजर हो जाएंगे और पाकिस्तान में पानी का संकट खड़ा हो जाएगा। लेकिन शिमला समझौते के स्थगित होने या रद्द होने से भारत को क्या घाटा होगा? घाटा होगा भी या नहीं? आइए समझते हैं।
शिमला समझौता टूटने से भारत को कितना फायदा?
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कब हुआ था शिमला समझौता
शिमला शांति समझौता 3 जुलाई 1972 हुआ था। शिमला समझौता तब हुआ था, जब भारत ने पाकिस्तान को तोड़कर बांग्लादेश बना दिया था। तब इंडियन आर्मी ने 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बना लिया गया था। पाकिस्तान के 15,010 वर्ग किलोमीटर (5,795 वर्ग मील) भूमि पर कब्जा कर लिया था। पाकिस्तान की गर्दन भारत की मुट्ठी में थी, तब शिमला शांति समझौता हुआ था। जिसपर भारत की ओर से तब की पीएम इंदिरा गांधी और पाकिस्तान की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए थे।
भारत-पाकिस्तान के बीच शिमला शांति समझौता (फोटो- Congress)
शिमला शांति समझौता है क्या, कैसे बचा था पाकिस्तान
- दोनों देशों के बीच रिश्तों का सामान्यीकरण: भारत और पाकिस्तान ने यह समझौता किया कि वे द्विपक्षीय मुद्दों को शांति से हल करेंगे और द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से किसी भी विवाद का समाधान करेंगे।
- कश्मीर पर विवाद: शिमला समझौते में यह तय किया गया कि कश्मीर का मुद्दा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत से हल होगा, और इसे संयुक्त राष्ट्र या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने से बचा जाएगा।
- सीजफायर लाइन का सम्मान: समझौते में यह भी कहा गया कि दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा (LoC) का सम्मान किया जाएगा।
- शांति बनाए रखना: दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आक्रमण न करने और शांति बनाए रखने का संकल्प लिया।
- व्यापार और कूटनीति: शिमला समझौते ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों को बेहतर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।
शिमला समझौते का महत्व
यह समझौता भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में एक मील का पत्थर था, क्योंकि इसके बाद दोनों देशों ने सीधे बातचीत के माध्यम से विवादों का समाधान करने की कोशिश की। हालांकि, कश्मीर मुद्दा अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है, लेकिन शिमला समझौता एक शांति प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
शिमला शांति समझौता
शिमला समझौते का बार-बार उल्लंघन
शिमला समझौता होने के बाद भारत ने भले ही इसका उल्लंघन न किया हो लेकिन सच ये है कि पाकिस्तान कई बार उल्लंघन कर चुका है। सियाचिन से लेकर करगिल वॉर तक इसका उदाहरण है। कश्मीर मामला दोनों देशों के बीच का है, लेकिन पाकिस्तान यह मुद्दा बार-बार अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाते रहा है।
- सियाचिन पर पाकिस्तान का कब्जा करने की कोशिश: 1984 में भारत ने ऑपरेशन मेघदूत शुरू किया और सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा किया, जिसे पहले पाकिस्तान ने अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की थी। सियाचिन की बर्फीली ऊंचाइयों पर भारत की सैन्य उपस्थिति ने उस क्षेत्र में नियंत्रण स्थापित किया। पाकिस्तान के इस प्रयास को भारत ने पूरी ताकत से नकारते हुए सियाचिन पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया। ऑपरेशन मेघदूत तब से लेकर आज तक सबसे लंबे समय तक चलने वाला सैन्य अभियान बन चुका है।
- कारगिल संघर्ष (1999): 1999 में पाकिस्तान ने एक बार फिर नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया, और कारगिल क्षेत्र में 150 वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि पर कब्जा कर लिया। यह भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग-1 (NH-1) की ओर जाती थी, जो भारत की लद्दाख और श्रीनगर से जुड़ी महत्वपूर्ण सड़क है। पाकिस्तान द्वारा नियंत्रण रेखा को एकतरफा बदलने के फैसले के कारण कारगिल युद्ध हुआ, जो 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच एक क्रूर संघर्ष में तब्दील हो गया। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए क्षेत्र को पुनः प्राप्त कर लिया और कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को पराजित किया।
- 2006 के बाद पाकिस्तान ने कई बार युद्ध विराम समझौते का उल्लंघन किया और नियंत्रण रेखा पर संघर्ष के कई मामले सामने आए। इसके चलते दोनों देशों के बीच तनाव बना रहा, हालांकि यह सीमा संघर्ष कारगिल युद्ध की तरह पूर्ण युद्ध में नहीं बदला।
शिमला समझौता खत्म होने से भारत को फायदा
शिमला समझौता अगर खत्म होता है तो भारत को भी इसका सीधा फायदा होगा। भारत पीओके में सीधे घुस सकता है, सीमापार आतंकी बेस पर हमले कर सकते है। क्योंकि अभी इस समझौते के कारण भारत के हाथ बंधे हैं।
1. कश्मीर मुद्दे पर स्पष्टता और दृढ़ता
- भारत के लिए कश्मीर का आंतरिक मुद्दा: अगर शिमला समझौता टूटता है, तो भारत कश्मीर को पूरी तरह से अपने आंतरिक मामले के रूप में पेश कर सकता है, बिना पाकिस्तान के किसी भी दखल के। यह भारत को कश्मीर के मुद्दे पर एक मजबूत स्थिति में लाएगा।
2. भारत-पाकिस्तान रिश्तों में बदलाव और संघर्ष विराम का हटना
- अगर समझौता टूटता है, तो भारत पाकिस्तान पर अपने आक्रमण और रक्षा क्षमताओं का परीक्षण कर सकता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि भारत को अपने सैन्य और सुरक्षा नीतियों को पुनः परिभाषित करने का अवसर मिल सकता है और वह सीमावर्ती क्षेत्रों में ज्यादा सतर्कता और तैयारी से काम कर सकता है।
3. कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण
- शिमला समझौते के टूटने के बाद भारत को पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में आतंकवाद फैलाने या सीमा पार आतंकवाद के मामलों पर कड़ा कदम उठाने का अवसर मिल सकता है। यह भारत को अधिक अधिकार देता है कि वह पाकिस्तान द्वारा किए गए किसी भी उकसावे का तुरंत जवाब दे सके और आतंकवाद से निपटने के लिए व्यापक सैन्य कार्रवाई कर सके।
4. वैश्विक स्तर पर समर्थन
- अगर पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाता है, तो भारत इसे अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के रूप में पेश कर सकता है। दुनिया के कई देशों, विशेष रूप से भारत के मित्र देशों से, उसे समर्थन मिल सकता है, क्योंकि भारत का यह तर्क हो सकता है कि कश्मीर का मुद्दा एक द्विपक्षीय विवाद है और यह किसी तीसरे पक्ष द्वारा हस्तक्षेप का विषय नहीं है। भारत ने शिमला समझौते में इसे एक द्विपक्षीय मामला मानने पर सहमति जताई थी और अब यह संदेश दिया जा सकता है कि पाकिस्तान इसका उल्लंघन कर रहा है।
5. सीमा पर सैन्य दबाव बढ़ाना
- शिमला समझौते के तहत सीमा पर शांति बनी रहती है, लेकिन अगर यह समझौता टूटता है, तो भारत पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ा सकता है। यह उसे पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में और सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी स्थिति को मजबूत करने का अवसर दे सकता है।
6. पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव
- शिमला समझौते का टूटना भारत को कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बनाने का एक अवसर प्रदान कर सकता है। भारत इस स्थिति का उपयोग कर सकता है ताकि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग किया जा सके, खासकर अगर पाकिस्तान कश्मीर में किसी तरह की आक्रामकता दिखाता है।
भारत के साथ इस समय कई शक्तिशाली देश
भारत इस समय काफी मजबूत स्थिति में है। पाकिस्तान के साथ पहले के जंग में जहां अमेरिका-ब्रिटेन समेत कई देश भारत के खिलाफ खड़े रहते थे, आज वो भारत के साथ पूरी तरह से सपोर्ट में है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इजराइल समेत कई विश्व के शक्तिशाली देश आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से भारत के साथ हैं। ऐसे में अगर शिमला समझौता टूटता है तो स्पष्ट रूप से पाकिस्तान को ही घाटा होगा। हालांकि पाकिस्तान की यही सोच होगी कि शिमला समझौते से हटने पर उसे फायदा होगा, लेकिन भारत इस समझौते के खत्म होने के बाद पीओके पर धावा बोल सकता है, जहां से भारत में पाकिस्तान के पाले हुए आतंकी घुसते हैं। भारत पीओके को वापस अपने पास ले सकता है।
