दशकों से एक-दूसरे के दुश्मन क्यों अमेरिका और ईरान? हालिया बमबारी से शुरू हुआ दुश्मनी का नया अध्याय

साल 1953 में ईरान में तख्तापलट हुआ था, जिसे ब्रिटिश समर्थन से सीआईए ने अंजाम दिया था। ऑपरेशन एजैक्स के तहत ईरान की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका गया और शाह मोहम्मद रजा पहलवी को सत्ता सौंप दी गई। यहीं से रिश्तों में दरार पड़ने लगी।

USA-Iran Relations: ईरान के परमाणु स्थलों पर हाल में हुए अमेरिकी हमलों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। यह अध्याय या तो बेहतर साबित हो सकता है या फिर और भी बुरा। लगभग आधी सदी के दौरान दुनिया ने दोनों देशों के बीच दुश्मनी के कई दौर देखे हैं। ईरान के लिए जहां अमेरिका सबसे बड़ा शैतान है तो वहीं अमेरिका की नजर में ईरान पश्चिम एशिया में फसाद की जड़ है। हालांकि इस दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लहजे में एक बदलाव भी दिखा जब उन्होंने कहा, ईश्वर ईरान का भला करे।

Iran USA

क्यों बिगड़े अमेरिका-ईरान के संबंध?

यह बदलाव इस सप्ताह ईरान के परमाणु स्थलों पर अमेरिका की भीषण बमबारी, कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के जवाबी लेकिन संयमित हमले और इजराइल-ईरान युद्ध में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से किए गए अस्थायी युद्ध विराम के बाद आया है। एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में पता चला है कि तीन ठिकानों पर अमेरिकी हमले से गंभीर क्षति हुई है, लेकिन वे नष्ट नहीं हुए हैं। यह रिपोर्ट ट्रंप के इस दावे के विपरीत है कि हमले ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट कर दिया। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बारे में कुछ सवाल और उनके जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

End of Feed