Lok Sabha Chunav: नीतीश कुमार कब अपना पाला बदल लें, इसकी भविष्यवाणी बड़े से बड़े राजनीतिक पंडित नहीं कर सकते हैं। सियासत में शह और मात का खेल खेलने में माहिर कुमार ने विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस (INDIA) को लेकर एक ऐसा कदम उठाया, जिसके बाद से तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। ये गुफ्तगू होने लगी है कि क्या बिहार के मुख्यमंत्री अब विपक्षी गठबंधन से पीछा छुड़ाना चाहते हैं?
लोकसभा चुनाव के लिए क्या है नीतीश कुमार का प्लान?
नीतीश के फैसले के पीछे के 3 मुख्य कारण
ये चर्चाएं इसलिए हो रही हैं, क्योंकि विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल दलों की शनिवार को वर्चुअल बैठक हुई। इसी बैठक में जदयू की ओर से अध्यक्ष नीतीश कुमार, पूर्व अध्यक्ष ललन सिंह और प्रदेश के मंत्री संजय झा शामिल हुए। इसी बीच जब बैठक में नीतीश कुमार को INDIA गठबंधन का संयोजक बनाने का प्रस्ताव रखा गया, तो उन्होंने ऐसा कदम उठाया, जिससे हर कोई हैरान रह गया। उन्होंने इस गठबंधन का संयोजक बनाए जाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। आखिर इसकी इनसाइड स्टोरी क्या है और उन्होंने क्यों ये फैसला लिया। आपको तीन अहम वजह समझाते हैं।
1). नीतीश कुमार को सता रहा है इस बात का डर
बीते कुछ दिनों से नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में जमकर उठापटक का दौर देखा गया। तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। नीतीश के राइट हैंड कहे जाने वाले ललन सिंह ने पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी त्याग दी और ऐसे हालात बन गए कि नीतीश को खुद अपने हाथों में पार्टी की कमान लेनी पड़ी। दावे तो ये भी किए जा रहे थे कि नीतीश पर लालू का दबाव है और कुछ दिनों में उनके सीएम पद की कुर्सी चली जाएगी, जदयू का आरजेडी में विलय हो जाएगा। जाहिर है कि कहीं न कहीं नीतीश के जेहन में एक खौफ जरूर पसर गया होगा कि अगर ऐसा हुआ, तो उनके दोनों हाथ खाली रह जाएंगे और क्या वो सिर्फ झुनझुना बजाते रह जाएंगे। क्योंकि राजनीति में कुछ भी हो सकता है, अगर नीतीश दिल्ली पर ज्यादा ध्यान देंगे तो कहीं उनके हाथों से बिहार न खिसक जाए।
2). नीतीश के दिमाग में पक रही है कोई खिचड़ी?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कब सियासी फायदे की खातिर पलटी मार लेंगे, इसका अंदाजा लगा पाना भी बिल्कुल वैसा ही है, जैसे रेत के मैदान में एक सुई को ढूंढना। बीते कुछ दिनों से उनके हाव-भाव बदले-बदले नजर आ रहे हैं। उन्होंने यूं ही नहीं INDIA गठबंधन का संयोजक बनने से इनकार किया है। पिछली बैठक की कहानी किसी से नहीं छिपी है, जब ममता बनर्जी ने मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम विपक्षी गठबंधन के चेहरे के लिए आगे कर दिया था, उस वक्त नीतीश उखड़ गए थे। ऐसे में अगर ये गुफ्तगू हो रही है कि वो फिर से पलटी मार सकते हैं, तो इसमें हैरानी को कोई बात नहीं है।
आपको याद दिला दें कि लंबे वक्त तक भाजपा के साथ गठबंधन में रहने वाले नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा को पानी पी-पीकर कोसा था, इसके बाद लालू की पार्टी के साथ मिलकर वो बिहार में सरकार बनाते हैं, मुख्यमंत्री बनते हैं और देखते ही देखते एक बार फिर लालू से पीछा छुड़ाकर भाजपा को गले लगा लेते हैं। 2019 का आम चुनाव एनडीए में रहते हुए लड़ते हैं। फिर 2020 का विधानसभा चुनाव भी साथ में लड़ते हैं, जिसमें उनकी पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा, बावजूद इसके वो फिर से सीएम बनते हैं। मगर न जाने क्यों, नीतीश कुमार ने पलटी मार ली और फिर से लालू के साथ चले गए। अब सवाल ये उठ रहा है कि
3). खुद रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं नीतीश कुमार
नीतीश कुमार ने इंडिया गठबंधन का संयोजक बनने के प्रस्ताव को ठुकराया तो ठुकराया, उन्होंने बैठक में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का नाम भी प्रस्तावित किया गया। दरअसल, राहुल गांधी ने गठबंधन के अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नाम प्रस्तावित किया था, लेकिन उनके मना करने के बाद दूसरे नेता ने लालू प्रसाद यादव का नाम प्रस्तावित किया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, 'यह सही है, लालू जी को अध्यक्ष बनाइए।' लालू प्रसाद यादव चुप रहे और राहुल गांधी ने फिर नीतीश कुमार का नाम प्रस्तावित किया। हालांकि, जद-यू नेता ललन सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे पार्टी के भीतर प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे।
अब यहां ये समझना अहम हो जाता है कि नीतीश कुमार आखिर चुनाव से पहले अपने कंधों पर ये बड़ी जिम्मेदारी क्यों नहीं लेना चाहते हैं। गठबंधन में सीट बंटवारा सबसे बड़ी चुनौती है, सबको साथ लेकर चलते हुए सबको संतुष्ट रखना अध्यक्ष का दायित्व है। ऐसे में नीतीश ये जानते हैं कि खुद रिस्क लेने से बेहतर है लालू को इसके लिए आगे किया जाए। इसमें फायदे की दो बातें हैं। पहली- गठबंधन का अध्यक्ष का नाता बिहार से होगा, जो नीतीश के लिए बेहतर रहेगा। दूसरी- नीतीश अपने सीएम की कुर्सी पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि मेरी किसी पद में कोई दिलचस्पी नहीं है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल; ललन सिंह और संजय झा के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार; जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला; राजद अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव; राकांपा प्रमुख शरद पवार; दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल; तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. वर्चुअल बैठक में स्टालिन के अलावा अन्य नेताओं ने भाग लिया।
