Mahrang Baloch: एक ऐसा इलाका जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जहां सोना, गैस, तांबा और समुद्री संसाधन हैं, लेकिन दशकों से यहां एक सवाल गूंज रहा है, क्या बलूचिस्तान के लोगों को उनका हक मिल रहा है? और यही सवाल जब बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान सरकार से पूछते हैं, तो उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया जाता है। एक लड़की जिसने बचपन में अपने पिता को खो दिया, जिसने परिवार पर हुए अत्याचारों को देखा और फिर डॉक्टर बनने के बाद अस्पताल की जगह आंदोलन का रास्ता चुना।
पाकिस्तान कोर्ट ने महरंग बलोच को सुनाई उम्रकैद की सजा। AI IMAGE
आज उसी डॉ. महरंग बलोच के नाम की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। 'बलूचिस्तान की शेरनी' के नाम से दुनिया में मशहूर महरंग को पाकिस्तान की एंटी-टेररिज़्म कोर्ट ने उ उम्रकैद की सजा सुनाई है। आखिर कौन हैं महरंग बलोच, जिसे बलूचिस्तान की शेरनी कहा जाता है? कैसे एक मेडिकल छात्रा ने शहबाज सरकार और आसिम मुनीर की नींद उड़ाकर रख दी? और बलूचिस्तान के लोग आखिर पाकिस्तान से आजादी के लिए सड़कों पर क्यों उतर आए हैं?
बलूचिस्तान की शेरनी...
साल 1993 में एक बलूच परिवार में जन्मी महरंग ने एमबीबीएस की पढ़ाई की है। उनके पिता का नाम अब्दुल गफ्फार था, जो कि एक मजदूर थे। महरंग के जन्म के समय उनका परिवार क्वेटा में रहता था, लेकिन उनकी बीमार माता के इलाज के चलते उनका परिवार कराची शिफ्ट हो गया। उनके पिता का क्वेटा से कराची आना उनके लिए गलत साबित हुआ। दरअसल, फरवरी 2009 में उनके पिता को अस्पताल जाते वक्त किडनैप कर लिया गया था। इसके करीब दो साल बाद उनकी लाश मिली। जब उसका पोस्टमार्टम कराया गया तब पता चला कि उन पर काफी अत्याचार किया गया था, जिस वजह से उनकी मौत हुई।
लेकिन इसके बाद भी महरंग के परिवार पर अत्याचारों का सिलसिला खत्म नहीं हुआ था। पिता की मौत के 8 साल बाद, यानी 2017 में, उनके भाई को भी अगवा कर लिया गया और करीब 3 महीने तक हिरासत में रखा। महरंग जब केवल 16 साल की थीं, तभी उनके सर से पिता का साया उठ गया था। उन्होंने इस छोटी उम्र से ही पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के खिलाफ आंदोलन करना शुरू कर दिया था, जिसके बाद समय के साथ महरंग बलूचिस्तान में विरोध का बड़ा चेहरा बन गईं।
महरंग बलोच आगे चलकर बलोच यकजेहती कमेटी यानी BYC से जुड़ीं और बाद में उसके प्रमुख चेहरों में शामिल हो गईं। संगठन खुद को शांतिपूर्ण नागरिक और मानवाधिकार आंदोलन बताता है। महरंग बलोच ने पाकिस्तान सेना और वहां की सरकार की सच्चाई दुनिया को दिखाया। किस तरह पाकिस्तान की सेना और उसकी सरकार, बलूचिस्तान के लोगों पर जुल्म करते हैं। सुरक्षा अभियान के नाम पर बलूचिस्तान के लोगों को किडनैप कर उनकी हत्या कर देते हैं।
वो फैसला जिसपर मचा बवाल
पाकिस्तान की एंटी टेररिज्म कोर्ट ने महरंग बलोच और BYC नेता सिबगतुल्लाह शाह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला 2024 में ग्वादर में हुए एक प्रदर्शन के दौरान एक सुरक्षा अधिकारी की मौत से जुड़ा बताया गया। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि प्रदर्शन हिंसक हुआ और उसमें सुरक्षा अधिकारी की मौत हुई। अदालत ने आतंकवाद, हत्या और अन्य आरोपों के तहत फैसला सुनाया। फैसले के बाद बलूचिस्तान के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। कुछ संगठनों ने शटर डाउन और विरोध कार्यक्रमों का ऐलान भी किया। समर्थकों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बहस है।
कहानी बलूचिस्तान की
बलूचिस्तान कोई सामान्य इलाका नहीं है। यह पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन आबादी सबसे कम है। यहां प्राकृतिक गैस, खनिज और ग्वादर पोर्ट जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट मौजूद हैं। बलूच राष्ट्रवादी समूहों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का लंबे समय से आरोप रहा है कि यहां के संसाधनों का फायदा बाहर जाता है लेकिन स्थानीय लोगों को पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं मिलती।
बलूचिस्तान को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा जिस मुद्दे पर होती है, वह है, कथित जबरन गायब (Enforced Disappearances) किए जाने के मामले। कई लोगों को हिरासत में लेने के बाद उनका पता नहीं चलता। जो लोग पाकिस्तान सरकार या उसकी सेना के खिलाफ आवाज उठाते हैं, वो कहां गायब हो जाते हैं किसी को खबर नहीं होती।
पाकिस्तानी की 'सोने की चिड़ियां'
पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान सिर्फ एक प्रांत नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र माना जाता है। देश के प्राकृतिक गैस भंडार का बड़ा हिस्सा यहीं मौजूद है। इसके अलावा तेल, सोना, तांबा और अन्य खनिज संसाधनों की वजह से भी यह इलाका लंबे समय से चर्चा में रहा है। कई विश्लेषक और स्थानीय समूह दावा करते हैं कि इन संसाधनों से बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियां होती हैं, लेकिन इसका पर्याप्त लाभ स्थानीय आबादी तक नहीं पहुंच पाता।
इसी वजह से बलूचिस्तान में लंबे समय से अधिकार, हिस्सेदारी और विकास को लेकर बहस होती रही है। आलोचक आरोप लगाते हैं कि क्षेत्र के लोगों की राजनीतिक और आर्थिक मांगों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जबकि पाकिस्तान सरकार इन मुद्दों को अपना आंतरिक मामला बताती रही है। हाल के वर्षों में बलूचिस्तान में विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों ने इस बहस को और तेज कर दिया है। अब वहां के कई लोग अपने अधिकारों, पहचान और भविष्य को लेकर खुलकर आवाज उठा रहे हैं।
