What is BLA: पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में मंगलवार को जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया गया। इस ट्रेन को अगवा करने की जिम्मेदारी बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने ली। रिपोर्टों के मुताबिक इस ट्रेन में करीब 450 लोग सवार हैं। रिपोर्टों में रेलवे के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि जाफर एक्सप्रेस के 9 कोच में सवार 450 यात्रियों और कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पाया है। पाकिस्तान के समा टीवी के मुताबिक यह ट्रेन सुबह नौ बजे क्वेटा से पेशावर के लिए रवाना हुई थी। बताया जा रहा है कि हथियारबंद लोगों ने यह हमला बलोचिस्तान के माच इलाके में किया। फायरिंग में पाकिस्तानी सेना के छह जवानों के मारे जाने की खबर है। बलोचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने जाफर एक्सप्रेस पर हमले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि जाफर एक्सप्रेस क्वेटा से पेशावर जा रही थी। हमले के दौरान भारी गोलीबारी हुई। हमले के बाद सिबी अस्पताल में इमरजेंसी घोषित हुई है। घटनास्थल पर एंबुलेंस को जाते देखा गया है। बीएलए ने 400 से ज्यादा लोगों को अगवा करने का दावा किया है। रिपोर्टों यह भी है कि पाकिस्तान सरकार ने स्पेशल फोर्स की 7 यूनिट भेजी है।
बलोच लिबरेशन आर्मी।
क्या है BLA
बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) एक सशस्त्र अलगाववादी गुट है जो अपनी आजादी के लिए पाकिस्तान से लड़ता आया है। बीएलए का आरोप है कि पाकिस्तान ने उसकी जमीन और उससे संसाधनों पर अवैध रूप से कब्जा किया है। यह संगठन खास तौर से बलोचिस्तान के दक्षिणी इलाके में सक्रिय है। यह आए दिन पाकिस्तानी सेना को नुकसान पहुंचाने के लिए उस पर हमले करता है। इस गुट की हिंसक गतिविधियों को देखते हुए कई देशों ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया है। बीएलए के अस्तित्व की अगर बात करें तो इसका जन्म दशकों तक चले बलोच राष्ट्रीय आंदोलन से हुआ। यह संगठन बलोच लोगों के लिए अलग देश और पाकिस्तानी से पूरी तरह आजादी की मांग करता है।
1948 में पाकिस्तान ने अवैध रूप से किया कब्जा
वैसे तो बलोच आंदोलन की शुरुआत 1940 के दशक में हो हो गई थी लेकिन 1948 में पाकिस्तान ने बलोचिस्तान पर जबरन कब्जा कर लिया। पाकिस्तानी सेना ने बलोच लोगों पर जुर्म किए और उनके बहुत सारे नेताओं को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दिया। इसके बाद बलोच पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते आए। पाकिस्तानी सेना का मुकाबला करने के लिए इन्होंने साल 2000 में अपनी BLA बनाई। इसके बाद से ही बीएलए पाकिस्तानी सेना और उसके प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाता आया है। बीएलए का दावा है कि उसके प्राकृतिक संसाधनों पर पाकिस्तान का कब्जा है और उसकी लूट हो रही है। इसका लाभ उन्हें नहीं मिलता है। जिन संसाधनों का इस्तेमाल बलोच लोगों के लिए होना चाहिए, वह किसी और के लिए होता है। बलोचिस्तान के लोग इससे वंचित है। दूसरा, राजनीति में भी इनकी हिस्सेदारी न के बराबर है। बलोचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में चीन के दखल का भी बीएलए विरोध करता आया है।
साल 2000 में नवाब अकबर बुगती की हत्या
रिपोर्टों की मानें तो पाकिस्तान की सेना बलोच लोगों, उनके सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं राजनीतिक आंदोलनों की अगुवाई करने वाले लोगों पर भी जुर्म करती आई है। पाकिस्तानी सेना के अत्याचार से परेशान होकर बड़ी संख्या में बलोचों ने दूसरे देशों में राजनीतिक शरण ली है। ये लोग दूसरे देशों से ही आजादी की अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। 1960 और 1970 के दशकों में बलोच विद्रोह हुए, लेकिन पाकिस्तान की सेना ने उन्हें दबा दिया। 2000 के दशक में, नवाब अकबर बुगती जैसे बलोच नेताओं की हत्या के बाद विद्रोह और तेज हो गया, और BLA इस संघर्ष में सबसे प्रमुख संगठन बनकर उभरी।
BLA के प्रमुख हमले
- 2018: चीनी वाणिज्य दूतावास पर हमला – कराची में स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास पर BLA के हमलावरों ने हमला किया
- 2019: ग्वादर के पर्ल कॉन्टिनेंटल होटल पर हमला –इस पांच सितारा होटल पर हमला करके BLA ने विदेशी निवेशकों को चेतावनी देने की कोशिश की
- 2022: कराची विश्वविद्यालय आत्मघाती हमला – एक बलोच महिला आत्मघाती हमलावर ने चीनी शिक्षकों की गाड़ी को निशाना बनाया
निशाने पर रही हैं सीपके से जुड़ी परियोजनाएं
BLA पाकिस्तानी सेना, पुलिस और सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमलों के लिए कुख्यात है। इसके अलावा, यह चीनी नागरिकों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़े परियोजनाओं को भी निशाना बनाता है, क्योंकि इसे बलोचिस्तान के संसाधनों की लूट के रूप में देखा जाता है।
बलूचिस्तान में सबसे बड़ा सशस्त्र समूह BLA
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीएलए को बलूचिस्तान में सक्रिय सबसे बड़ा सशस्त्र समूह माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीएलए के कई हजार सदस्य हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) 25 साल से अधिक समय से सक्रिय है और ज्यादातर छोटे हमले करता रहा है लेकिन पिछले कुछ महीनों में इसने पाकिस्तान में कई बड़े हमलों को अंजाम दिया है। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' के मुताबिक वर्ष 2024 में बलूचिस्तान में हिंसक गतिविधियों में तीव्र वृद्धि देखी गई क्योंकि 'स्वतंत्रता समर्थक उग्रवादी समूहों ने पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ अपने अभियान तेज कर दिए।
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2024 में बीएलए ने 302 हमले किए
बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए), बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ), बलूच राजी आजोई संगर (बीआरएएस) और अन्य संगठनों ने कथित तौर पर सैन्य बलों, बुनियादी ढांचे और राज्य सहयोगियों को निशाना बनाकर सैकड़ों हमले किए। सामूहिक रूप से, इन ग्रुप्स ने 938 हमले किए, जिसके परिणामस्वरूप 1002 से अधिक मौतें, 689 घायल और कम से कम 546 संपत्ति को नुकसान पहुंचा। 2024 में बीएलए सबसे सक्रिय ग्रुप बना रहा, जिसने 302 हमले किए, जिनमें कथित तौर पर 580 से ज्यादा लोगों की मौत हुई जबकि 370 से अधिक घायल हुए। कम से कम 171 हमलों में संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
पाकिस्तानी सेना को काफी नुकसान पहुंचाया
ग्रुप ने 21 जिलों में 240 क्षेत्रों में ऑपरेशन करने का दावा किया। रिपोर्ट के मुताबिक इसके करीब 52 लड़ाके मारे गए जिनमें से अधिकतर मजीद ब्रिगेड के थे। मजीद ब्रिगेड हाई-प्रोफाइल आत्मघाती अभियानों को अंजाम देती है। बीएलए ने कहा कि मजीद ब्रिगेड ने 2024 में छह बड़े ऑपरेशन किए, जिससे कथित तौर पर पाकिस्तानी सेना को काफी नुकसान हुआ। बीएलए को पाकिस्तान, ईरान, चीन, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ ने आतंकी संगठन घोषित किया है।
