संसद में किस मुद्दे पर कितनी देर बहस होगी? जानिए कौन तय करता है और कैसे

भारतीय संसद में किसी मुद्दे पर कितने घंटे चर्चा होगी, यह मुख्य रूप से "बिजनेस एडवाइजरी कमेटी" के निर्णय पर निर्भर करता है। समिति में सभी दलों के प्रतिनिधि मिलकर यह तय करते हैं कि कौन-सा मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है और उस पर कितना समय दिया जाना चाहिए।

जब भी संसद का सत्र शुरू होता है तो सबसे आम लाइन ये सुनने को मिलती है कि 'सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं है', 'हम फलाने मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हैं',' सरकार चर्चा के लिए तैयार है, विपक्ष हंगामा न करे'। इन वाक्यों में एक चीज कॉमन है वो है- चर्चा यानि कि डिबेट यानि कि बहस। संसद के अंदर बहस, भारतीय संसदीय प्रणाली की सबसे खूबसूरत प्रक्रिया मानी गई है। इस सिस्टम के तहत हर उन मुद्दों पर चर्चा होती है या हो सकती है, जिसका देश से सीधा सारोकार है। संसद के अंदर की हर चर्चा, भारत की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संसद के अंदर होने वाली इन चर्चाओं के मुद्दे और समय कौन तय करता है, किसके पास संसद के अंदर चर्चा कराने की शक्ति है, संसदीय प्रणाली के किस नियम के तहत लोकसभा और राज्यसभा में चर्चाएं होती हैं? आइए आज इसी को समझते हैं।

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