क्या है दहेज कानून? अधिनियम की कौन सी धाराएं महिलाओं को देती हैं सुरक्षा

दहेज एक ऐसी कुप्रथा है जो लंबे समय से चली आ रही है। विवाह के समय लड़की पक्ष से धन, गाड़ी, गहने या अन्य वस्तुओं की मांग की जाती है। इस कुरीति पर रोक लगाने के लिए सरकार ने दहेज निषेध कानून बनाया है, फिर भी यह प्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इस बुराई पर रोक लगाने के लिए केवल शिक्षित होना ही काफी नहीं है बल्कि जागरूक होना भी जरूरी है।

Dowry Prohibition Act 1961 : दहेज समाज की ऐसी बुराई है जिससे आए दिन हम सभी का साबका होता रहता है। शिक्षित एवं सभ्य समाज में दहेज उत्पीड़न और इसके चलते होने वाली मौतें समाज के माथे पर कलंक हैं। दहेज रूपी दानव हमारी मासूम बेटियों को अपना शिकार बनाता आ रहा है। दहेज उत्पीड़न के चलते हर साल हजारों की संख्या में बेटियों को असमय अपनी जान गंवानी पड़ती है तो कइयों को जिंदगी तबाह हो जाती है। समाज और सरकार की तमाम कोशिशों, जागरूकता अभियानों और कानूनी सुरक्षा के बावजूद भी इस 'दानव' पर विजय नहीं पाई जा सकी है। यह अभिशाप कितना बड़ा है, इसे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों से समझा जा सकता है। NCRB के मुताबिक साल 2024 में दहेज उत्पीड़न की वजह से 5737 मौतें हुईं।

Dowry Law

हर साल दहेज उत्पीड़न का शिकार होती हैं महिलाएं।

लंबे समय से चली आ रही है यह कुप्रथा

यह एक ऐसी कुप्रथा है जो लंबे समय से चली आ रही है। विवाह के समय लड़की पक्ष से धन, गाड़ी, गहने या अन्य वस्तुओं की मांग की जाती है। इस कुरीति पर रोक लगाने के लिए सरकार ने दहेज निषेध कानून बनाया है, फिर भी यह प्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इस बुराई पर रोक लगाने के लिए केवल शिक्षित होना ही काफी नहीं है बल्कि जागरूक होना भी जरूरी है। शिक्षित और जागरूक होकर ही इस कुप्रथा को समाप्त और बेटियों को सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है।

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