क्या है धार का भोजशाला विवाद? जानिए इस प्राचीन मंदिर का इतिहास और इससे जुड़ी आस्था

ऐसा माना जाता है कि एक हिंदू राजा, राजा भोज ने 1034 ई. में भोजशाला में वाग्देवी की मूर्ति स्थापित की थी। बाद के वर्षोंं में इसे मस्जिद में बदल दिया गया।

Dhar Bhojshala Controversy: न्यायालय ने धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर की धार्मिक प्रकृति के विवाद के मामले में फैसला सुनाने के लिए 15 मई (शुक्रवार) की तारीख तय की है। उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू की थी। सभी संबद्ध पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने 12 मई (मंगलवार) को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आस्था से जुड़े इस मामले में कोर्ट आज फैसला सुना सकता है। इस धरोहर को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों में विवाद है। आइए जानते हैं कि यह विवाद क्या है-

Bhojshala

क्या है भोजशाला विवाद?

क्या है विवाद?

ऐसा माना जाता है कि एक हिंदू राजा, राजा भोज ने 1034 ई. में भोजशाला में वाग्देवी की मूर्ति स्थापित की थी। हिंदू समूहों का कहना है कि अंग्रेज इस मूर्ति को 1875 में लंदन ले गए थे। वहीं, भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद पर हिंदू और मुस्लिम समान रूप से दावा करते हैं। हिंदुओं के लिए यह देवी वाग्देवी यानी सरस्वती का मंदिर है। दूसरी ओर मुस्लिम इसे कमाल मौला मस्जिद मानते हैं। भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है।

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