बीते हफ्ते दुनिया ने देखा कि अमेरिकी किस कदर अपने आजाद आवाज के लिए लामबंद हुए। मुल्क के 50 सूबों में गुस्से को लहर देखी गयी। ‘हैंडस ऑफ’ के बैनर तले अमेरिकी एकजुट हुए और अपनी नाराजगी जाहिर की। कई मसलों जैसे गिरती इकोनॉमी, शरणार्थियों के निर्वासन, हेल्थ फंड में कटौती, नौकरियों से छंटाई और ट्रांसजेंडरों को लेकर बढ़ती राजकीय अंसवेदनशीलता पर लोगों ने ट्रंप की जमकर मुखालफत और मजम्मत की, साथ ही एलन मस्क को भी कटघरे में खड़ा किया। अमेरिकी आवाम का मानना है कि ट्रंप सिर्फ चेहरा हैं, खेल की असली बिसात मस्क की बिछाई हुई है। बढ़ते दबाव के बीच खबरें ये भी छनकर आ रही हैं कि ट्रंप प्रशासन में मस्क की भूमिका जल्द सीमित हो सकती है। मौजूदा अमेरिकी प्रशासन में एलन मस्क पिछले दरवाज़े से डिपार्टमेंट ऑफ गर्वनमेंट एफिशियंसी (डीओजीई) की कमान संभाले हुए हैं। इस महकमे के तले कई कथित बड़ी सियासी पहल की गयीं, इस फेहरिस्त में कई विवादित नियुक्तियां भी शुमार है। डिपार्टमेंट ऑफ गर्वनमेंट एफिशियंसी की सिफारिश पर कई अहम ओहदे कम काबिल/गैर जिम्मेदार लोगों को दिए गए जिसे लेकर अमेरिकी आवाम में खासा नाराजगी है।
अमेरिका में ट्रंप और मस्क की जोड़ी के खिलाफ प्रदर्शन
मस्क की चौतरफा मजबूत पहुंच
सियासी भंवर में फंसे मस्क इस अंधड़ से कैसे पार पायेंगे, ये देखने वाली बात होगी। फिलहाल ये बात पुख्ता है कि अगर वो अपनी भूमिका ट्रंप प्रशासन में पूरी तरह से खत्म कर लेते हैं तो वो अमेरिकियों के लिए ऐसी तबाही छोड़कर जायेगें जो कि उनकी दिमाग की उपज डीओजीई से कहीं ज्यादा खतरनाक होगा। मौजूदा दौर में मस्क की पहुंच अंतरिक्ष, वेब और ऑफलाइन हर जगह है। यानि कि ओवल हाउस से लेकर प्वाइंट निमो तक वो अपनी ताकत का असर छोड़ने की कुव्वत रखते है। ऐसे में साफ है कि उन्हें खफा करने का मतलब इंटरनेट, इकोनॉमी, पॉलिटिक्स और स्पेस मिशन से वो अपने हाथ पीछे सकते हैं, इससे दुनिया की रफ्तार थम सी सकती है।
अमेरिकी प्रशासन से मिली हैं कई रियायतें
जिस तरह से विरोध प्रदर्शन बढ़े हैं, उसे देखकर साफ लगता है कि मस्क की अगुवाई में यूएसएड के फंड्स में कटौती और कई संघीय एजेंसियों के पुनर्गठन की योजना ठंडे बस्ते में जा सकती है। तस्वीर का दूसरा रूख ये भी है कि मौजूदा हालातों में उनकी कंपनियों टेस्ला, स्पेसएक्स, और एक्स कॉर्प को अमेरिकी नीति नियंता कई छूट दे रहे हैं। उनके कई प्रोजेक्ट्स को सरकारी सब्सिडी के साथ सरकारी नियमों में ढील भी मिल रही है। स्पेस रिसर्च के लिए अमेरिकी हुकूमत ने उन्हें मोटा अनुदान आंबटित किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के करीबी होने के चलते एलन की कंपनी को नासा से कई बड़े प्रोजेक्ट्स भी हासिल हुए हैं।
सरकारी महकमे में मस्क के खिलाफ कोई आवाज नहीं
जिस तरह से बीते शनिवार (5 अप्रैल 2025) अमेरिकी सूबों में विरोध की आंधी देखी गयी, उससे साफ हो गया कि रियाया का बड़ा हिस्सा मस्क को अमेरिकी जम्हूरियत पर कब़्जा करने वाले कारोबारी के तौर पर देखता है। उनका मानना है कि डीओजीई के जरिए वो अपने निजी व्यापारिक हित साधना चाहते हैं, चूंकि वो अमेरिकी सदर के चहेते हैं इसलिए वाशिंगटन, कैपिटल हिल, व्हाइट हाउस और ओवल ऑफिस में कोई भी उनके खिलाफ आवाज उठाने से कतराता है। मस्क के चाहने वाले मानते हैं कि डीओजीई की सिफारिशों के तले 10 फीसदी सरकारी खर्चों में कटौती करके वो सही राह पर मुल्क को आगे ले जा रहे हैं। फिलहाल के समीकरण को देखकर यहीं लगता है कि अगर डीओजीई कमजोर हुआ और ये आंदोलन लंबा खींचा तो उनकी छवि को नुकसान पहुंचना तय है।
दांव पर है एलन मस्क का कारोबार
अमेरिकी सरजमीं पर चल रहे प्रर्दशनों का असर मस्क के कई प्रोजेक्ट्स, कंपनियों और निवेशकों पर सीधा पड़ेगा। मोटे अनुमान के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में टेस्ला कारों की बिक्री में 5-7 फीसदी की सीधा गिरावट आ सकती है। अगर ट्रंप सरकार जनदबाव में आ गयी तो टेस्ला में सरकारी सब्सिडी की संभावित कटौती से कार की बैट्री और सोलर प्रोजेक्ट्स पर सीधा असर पड़ेगा। गौरतलब है कि मामला सियासी पहलूओं से जुड़ा हुआ है, ऐसे में रिपब्लिकन समर्थक इलाकों में टेस्ला की बिक्री पर ना के बराबर असर पड़ेगा। दूसरी ओर स्पेसएक्स जिसे नासा और पेंटागन से करीब 12.8 बिलियन से ज्यादा के कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं, उस पर भी आंदोलन का असर पड़ेगा, कंपनी के स्टॉक मूल्य में 10 फीसदी के आसपास की गिरावट देखी जा सकती है। मस्क की सोशल मीडिया कंपनी एक्स 24 बिलियन डॉलर के घाटे में चल रही है, जिस तरह से आम अमेरिकी लामबंद हुए हैं, उसे देखते हुए कई विज्ञापनदाता एक्स को काम देने से कतराते दिख रहे हैं। इल्जाम ये भी लगाए जा रहे हैं कि कंपनी का एल्गोरिथ्म खास किस्म की विचारधारा से प्रेरित है, इसलिए उसका मंच गलत, भ्रामक, दुर्भावनापूर्ण और पूर्वाग्रहों वाली जानकारियों से भरा हुआ है। आंदोलन का दीर्घकालिक असर न्यूरालिंक ब्रेन-मशीन इंटरफेस प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ेगा। पहले ही इसकी नैतिकता को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं, अगर नियामक संस्थाएं जनदबाव में आ गयीं तो इस परियोजना के मानवीय परीक्षण में खासा देरी होगी जिसका सीधा नुकसान निवेशकों को उठाना पड़ेगा। एलन की हाइपरलूप परियोजना पहले से ही सुस्त पड़ी हुई है, अगर आंदोलन में मजबूत लॉबिंग हुई तो ये भी पीछे छूट सकती है।
मस्क के लिए आपदा और अवसर
अमेरिकियों की लामबंदी डोनाल्ड ट्रंप के लिए परेशानी का सबब है तो मस्क के लिए इंतिहान की घड़ी। प्रदर्शनकारियों ने जो माहौल तैयार किया है उससे मस्क की कंपनियों के स्टॉक पर असर पड़ा है, इसने कंपनियों के शेयरों में फिलहाल अल्पकालिक अस्थिरता बढ़ाई है। मौजूदा माहौल का फायदा मस्क की टक्कर में खड़ी दूसरी कंपनियों को मिल सकता है। अगर ज्यादातर निवेशकों का भरोसा डगमगा गया तो मस्क को मार्केट से पैसा उठाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, ऐसा हुआ तो उनकी साख, विश्वसनीयता और छवि पर भारी बट्टा लगेगा। मार्केट पैटर्न देखते हुए लगता है कि जोखिम से बचने वाले निवेशक धीरे-धीरे हाथ पीछे खींचना शुरू कर चुके हैं। आंदोलन की चिंगारियां मस्क के लिए आपदा के साथ अवसर भी है, ये उनके नजरिए और फैसलों से तय होगा। अस्थिरता और कथित सियासी ध्रुवीकरण के बीच वो आंदोलन से पैदा हुए दबाव को किस तरह अपने पक्ष में मोड पाते ये देखना दिलचस्प होगा।
ऐसे हो सकेगा डैमेज कंट्रोल
मस्क के पास अमेरिकी प्रशासन के अलावा दूसरे रास्ते खुले हुए हैं, जिनकी मदद से वो अपने तिजारती तालुक्कात को नयी धार दे सकते हैं। यूरोपियन यूनियन स्पेस एजेंसी, अमेजन या गूगल के साथ वो अपनी नई कारोबारी पारी की शुरूआत कर सकते हैं, इसकी मदद से वो अपने स्पेसएक्स प्रोग्राम की फंडिंग से जुड़ी जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। अगर वो अपनी टैरिफ दरें घटाते हैं तो स्टारलिंक दक्षिण-एशिया और अफ्रीका में धूम मचा सकता है, जाहिर है इससे आमदनी में इजाफा होना पक्का है। डीओजीई से जुड़े विवादों से बचने के लिए वो स्वतंत्र सलाहकार बन सकते हैं, इससे उनकी छवि तटस्थ तो होगी ही साथ ही वो नीतिगत रूप से संतुलित दिखाई देंगे। फिलहाल उन्हें एक्स पर सिलसिलेवार ढंग से कई लाइव सैशन करने चाहिए जहां वो आंदोलन के कथित दावों का जवाब देते हुए डीओजीई की जनहितकारी नीतियों से लोगों को अवगत कराए। राजनीति और कूटनीतिक ध्रुवीकरण से बचने के लिए उन्हें डेमोक्रेट्स को भी विश्वास में लेना होगा, इससे उनकी विश्वसनीयता में खासा इजाफा होगा।
इस लेख के लेखक राम अजोर जो स्वतंत्र पत्रकार एवं समसमायिक मामलों के विश्लेषक हैं।
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