पाकिस्तान से तनाव के बीच भारत को बड़ी सैन्य मदद मिलने जा रही है। भारत को सैन्य हार्डवेयर की डिलिवरी को अमेरिका ने मंजूरी दे दी है। यानी अमेरिका जल्द ही भारत को 13.1 करोड़ डॉलर का सैन्य साजो-सामान भेजेगा। तो क्या भारत अब पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए तैयार हो चुका है? पाकिस्तान की नापाक करतूत का अब हिसाब होने वाला है, जिसके लिए रणनीतियां तो तैयार हो ही रही हैं, साथ ही अब हिंदुस्तान को दुनिया का साथ मिल रहा है।
भारत को सैन्य हार्डवेयर की डिलिवरी को अमेरिका ने दे दी मंजूरी।
अमेरिका ने 131 मिलियन डॉलर की सैन्य बिक्री को दी मंजूरी
अमेरिका ने पहले ही साफ कर दिया है कि वो भारत के रक्षा के अधिकार का समर्थन करता है। इस बीच अमेरिका ने भारत को हथियारों की बड़ी खेप भेजने का फैसला किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को संभावित 131 मिलियन अमेरिकी डॉलर की विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ाना है। बुधवार को रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी द्वारा घोषित इस सौदे में भारत की समुद्री डोमेन जागरूकता को बढ़ाने और दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए उन्नत सीविज़न सॉफ़्टवेयर, प्रशिक्षण और सहायता सेवाएं शामिल हैं।
भारत-अमेरिका के बीच हुई बड़ी डील।
एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए, अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, 'विदेश विभाग भारत के लिए इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन जागरूकता सॉफ़्टवेयर और संबंधित उपकरण खरीदने के लिए 131 मिलियन डॉलर की अनुमानित लागत के लिए एक विदेशी सैन्य बिक्री (एफएमएस) मामले को अधिकृत करता है।' अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने बुधवार को कहा, 'विदेश विभाग ने भारत को इंडो-पैसिफिक समुद्री डोमेन जागरूकता और संबंधित उपकरणों की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी देने का निर्णय लिया है, जिसकी अनुमानित लागत 131 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने आज कांग्रेस को इस संभावित बिक्री के बारे में सूचित करते हुए आवश्यक प्रमाणीकरण प्रदान किया।'
इसमें आगे कहा गया, 'भारत सरकार ने सीविजन सॉफ़्टवेयर (अनुरोधित सॉफ़्टवेयर संवर्द्धन सहित) खरीदने का अनुरोध किया है; तकनीकी सहायता फ़ील्ड टीम (TAFT) प्रशिक्षण; दूरस्थ सॉफ़्टवेयर और विश्लेषणात्मक सहायता; सीविजन प्रलेखन तक पहुंच; और रसद और कार्यक्रम समर्थन के अन्य संबंधित तत्व। अनुमानित कुल लागत 131 मिलियन अमेरिकी डॉलर है।'
अमेरिका-भारतीय रणनीतिक संबंधों को मिलेगी और मजबूती
रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने आगे कहा कि प्रस्तावित बिक्री अमेरिका-भारतीय रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और एक प्रमुख रक्षा साझेदार की सुरक्षा में सुधार करने में मदद करके संयुक्त राज्य अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करेगी, जो इंडो-पैसिफिक और दक्षिण एशिया क्षेत्रों में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति बनी हुई है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र।
इसमें कहा गया है, 'प्रस्तावित बिक्री भारत की समुद्री क्षेत्र जागरूकता, विश्लेषणात्मक क्षमताओं और रणनीतिक स्थिति को मजबूत करके वर्तमान और भविष्य के खतरों से निपटने की क्षमता में सुधार करेगी। भारत को इन वस्तुओं और सेवाओं को अपने सशस्त्र बलों में शामिल करने में कोई कठिनाई नहीं होगी। इस उपकरण और सहायता की प्रस्तावित बिक्री से क्षेत्र में बुनियादी सैन्य संतुलन में कोई बदलाव नहीं आएगा। मुख्य ठेकेदार वर्जीनिया के हर्नडन में स्थित हॉकआई 360 होगा।'
कितना आधुनिक है अमेरिका का समुद्री निगरानी तकनीक?
अमेरिका की समुद्री निगरानी तकनीक बहुत उन्नत है और इसमें कई प्रकार की तकनीकें शामिल हैं। मुख्य रूप से 5 तकनीकों का उपयोग करके, अमेरिका अपनी समुद्री सीमाओं की निगरानी करता है और समुद्री सुरक्षा को बनाए रखने में मदद करता है। जो इस प्रकार है...
1. रडार सिस्टम: अमेरिका की नौसेना और तट रक्षक बल रडार सिस्टम का उपयोग करके समुद्री गतिविधियों की निगरानी करते हैं।
2. सोनार सिस्टम: सोनार सिस्टम का उपयोग करके समुद्री जहाज और पनडुब्बियों का पता लगाया जा सकता है।
3. उपग्रह निगरानी: अमेरिका उपग्रहों का उपयोग करके समुद्री गतिविधियों की निगरानी करता है, जिसमें जहाजों की ट्रैकिंग और समुद्री परिस्थितियों की निगरानी शामिल है।
4. एआईएस (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम): एआईएस एक प्रणाली है जो जहाजों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए उपयोग की जाती है।
5. ड्रोन और मानव रहित विमान: अमेरिका की नौसेना और तट रक्षक बल ड्रोन और मानव रहित विमानों का उपयोग करके समुद्री निगरानी करते हैं।
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान से कैसे बदला लेगा भारत?
ये नया भारत है, जो घर में घुसकर मारता है... पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये ऐलान किया था। जब-जब भारत के दुश्मन देश पाकिस्तान ने आंख उठाई, उसको हमारी सेना ने उसकी औकात याद दिलाई। ऐसे में भारत पहलगाम आतंकी हमले का बदला कब और कैसे लेगा? इस सवाल का जवाब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया जानना चाहती है। अब तो ये भी साफ हो गया है कि पहलगाम हमले में सिर्फ आतंकी संगठन ही नहीं बल्कि ISI और पाकिस्तान की संलिप्तता भी थी।
NIA की प्रारंभिक रिपोर्ट में हुआ है इस बड़ी बात का खुलासा
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में पाकिस्तान भले ही कितना भी इनकार कर ले लेकिन जो सबूत मिले हैं, उससे साफ है कि पाकिस्तान ने न सिर्फ आतंकियों को पहलगाम में हमले के लिए भेजा, बल्कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और पाक आर्मी पूरी तरह से इस हमले में शामिल थी। ISI और पाकिस्तान की आर्मी की मदद से पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिया गया। NIA की प्रारंभिक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
भारत के रक्षा के अधिकार का समर्थन करता है अमेरिका
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पहलगाम आतंकवादी हमले को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से एक दिन पहले ही फोन पर बात की और कहा कि उनका देश भारत के आत्मरक्षा के अधिकार और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का समर्थन करता है। राजनाथ सिंह ने हेगसेथ से कहा कि पाकिस्तान एक “दुष्ट” देश के रूप में “बेनकाब” हो गया है जो वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है तथा क्षेत्र को “अस्थिर” कर रहा है।
