PM Modi And Giorgia Meloni Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) की मुलाकात इस समय अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार जगत में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। दोनों नेताओं के बीच सबसे अहम मुद्दा इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC Corridor) को माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाला एक बड़ा व्यापारिक और कनेक्टिविटी नेटवर्क है।
चीन के BRI प्रोजेक्ट को चुनौती दे सकता है IMEC (Photo: AI Generated)
IMEC क्या है?
IMEC को भविष्य के सबसे बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। इसके जरिए रेलवे लाइन, सड़क मार्ग, बंदरगाह, पाइपलाइन और डिजिटल नेटवर्क को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा। इस कॉरिडोर के दो हिस्से होंगे। पहला हिस्सा भारत को संयुक्त अरब अमीरात से जोड़ेगा, जबकि दूसरा हिस्सा सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल के रास्ते यूरोप तक पहुंचेगा। इस परियोजना में भारत के अलावा अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब, इटली, फ्रांस और जर्मनी जैसे कई बड़े देश शामिल हैं।
चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के लिए बड़ा चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि IMEC चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव यानी BRI और पाकिस्तान के चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के लिए बड़ा चुनौती बन सकता है। चीन पिछले कई वर्षों से अलग-अलग देशों में सड़क और रेल परियोजनाओं पर काम कर रहा है। हालांकि कई देशों ने चीन की परियोजनाओं में बढ़ते कर्ज और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। ऐसे में IMEC को एक पारदर्शी और भरोसेमंद व्यापारिक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
भारत और यूरोप के बीच व्यापार को होगा सबसे बड़ा फायदा
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा भारत और यूरोप के बीच व्यापार को होगा। अभी सामान भेजने में लंबा समय लगता है और खर्च भी ज्यादा आता है। नया कॉरिडोर बनने से माल कम समय में पहुंच सकेगा। इससे व्यापार बढ़ेगा, परिवहन खर्च घटेगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा ऊर्जा और डिजिटल डेटा के आदान-प्रदान में भी आसानी होगी।
IMEC भविष्य की मजबूत आर्थिक साझेदारी का प्रतीक
इटली इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री मेलोनी भी चाहती हैं कि यूरोप अपनी आर्थिक निर्भरता चीन पर कम करे। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की बातचीत में निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट को तेजी से लागू करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। IMEC सिर्फ एक व्यापारिक रास्ता नहीं है, बल्कि यह भविष्य की मजबूत आर्थिक साझेदारी का प्रतीक बनता जा रहा है। अगर यह योजना सफल होती है तो वैश्विक व्यापार का नक्शा बदल सकता है और भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है।
