नेपाल त्रासदी के बाद अरुणाचल सीमा के पास बन रहे चीन के 'मेदोग डैम' को लेकर क्यों बढ़ी चिंता, पानी छोड़ा तो क्या करेगा भारत?

India Northeast Flood Danger: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद तिब्बत में भारत-चीन सीमा के पास चीन द्वारा बनाए जा रहे 60,000 MW क्षमता वाले दुनिया के सबसे बड़े 'मेडोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट' को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की।

China Medog Dam: हिमालय दुनिया की सबसे ज्यादा भूकंप-संवेदनशील पर्वत श्रृंखला है। भूकंप से आए हिमस्खलन (avalanche) के कारण आई बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर 270 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है और सैकड़ों लोग लापता हैं। पानी की बेकाबू लहरों से हुई तबाही ने विशेषज्ञों को उस विशालकाय बांध के बारे में भी आगाह किया है जिसे चीन भारत की सीमा के ठीक बगल में बना रहा है।

नेपाल त्रासदी के बाद अरुणाचल सीमा के पास बन रहे चीन के 'मेदोग डैम' को लेकर क्यों बढ़ी चिंता, पानी छोड़ा तो क्या करेगा भारत?

नेपाल त्रासदी के बाद अरुणाचल सीमा के पास बन रहे चीन के 'मेदोग डैम' को लेकर क्यों बढ़ी चिंता, पानी छोड़ा तो क्या करेगा भारत? (istock)

चीन यारलुंग त्सांगपो नदी पर 60,000 मेगावाट (MW) का मेडोग बांध बना रहा है; यही नदी भारत में ब्रह्मपुत्र कहलाती है और यह अरुणाचल प्रदेश के पास है। बीजिंग 2033 तक इस बांध को चालू करने की योजना बना रहा है। यह बांध चीन के कब्जे वाले तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) के मेडोग या मेडोंग इलाके में स्थित है। यह इलाका भूकंप-संवेदनशील है, इसलिए विशेषज्ञों ने इतने बड़े बांध को 'वॉटर बॉम्ब' (पानी का बम) कहा है।

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