मुख्तार अंसारी ने BJP विधायक कृष्णानंद राय को मारने की क्यों रची थी साजिश, विस्तार से जानकारी

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Apr 6, 2023, 10:29 PM IST

Krishnanad Rai Murder Explainer: कृष्णानंद राय यूपी के गाजीपुर जिले के रहने वाले थे। 2002 में उन्होंने मोहम्मदाबाद यूसुफपुर सीट से उस परिवार (मुख्तार अंसारी-अफजाल अंसारी) को मात दी थी जिसकी मात्र कल्पना ही की जा सकती थी। सियासी हार से बौखलाए मुख्तार को सिर्फ एक ही रास्ता नजर आया कि वो किसी तरह से कृष्णानंद राय को अपने रास्ते से हमेशा के लिए हटा दे। उसने अपनी सियासी साजिश को अंजाम देने के लिए मौके का इंतजार किया और 29 नवंबर 2005 को हत्या करा दी।

KEY HIGHLIGHTS
  • 2005 में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हुई थी हत्या
  • मोहम्मदाबाद यूसुफपुर से 2002 में विधायक चुने गए
  • मुख्तार अंसारी के बड़े भाई को दी थी मात

Krishnanad Rai Murder Explainer: कुख्यात बदमाश मुख्तार अंसारी के लिए 15 अप्रैल 2023 निर्णायक साबित होने वाला है। गाजीपुर का एमपी-एमएलए कोर्ट अगर बरी करे या दोषी करार दे तो दोनों ही सूरत में फैसला इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। अदालती फैसले की तारीख बेशक 15 अप्रैल है लेकिन मामला 18 साल पुराना है। 2005 का वो साल और महीना नवंबर का। ठंड गुलाबी थी लेकिन जिस वारदात को अंजाम दिया गया था उसके बाद सियासत में उबाल दूध की उबाल की तरह आया और करीब सात दिनों तक गाजीपुर, वाराणसी में तनाव बना रहा। जिस शख्स के काफिले पर ए के 47 से करीब 500 राउंड गोलियां दागी गई थीं वो कोई आम नहीं बल्कि खास था। बीजेपी के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय(2005 krishnanand rai murder case) को उनकी ही सरकार में गोलियों से छलनी कर दिया गया था। पोस्टमार्टम के बाद उनकी शरीर से निकली गोलियों की संख्या खौफनाक साजिश को खुद ब खुद बयां कर रही थी। लेकिन यहां बताएंगे कि आखिर वो कौन सी वजह थी जिसमें मुख्तार अंसारी(Mukhtar Ansari Accused) आरोपी नंबर 1 बना।

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कृष्णानंद राय मर्डर केस में आरोपी है मुख्तार अंसारी

इस तरह शुरू हुई अदावत

यूपी के पूर्वांचल वाले हिस्से में गाजीपुर जनपद को लहुरी काशी (Ghazipur as small Kashi) के नाम से भी जाना जाता है। इस जिले का इतिहास कामयाबियों की कहानियों से भरा पड़ा है। लेकिन कामयाबियों की कहानियों में कुछ ऐसे अध्याय हैं जिसके पन्ने काले हैं। किसी अपराध को पेशेवर अपराधी द्वारा अंजाम देने को सामान्य सी घटना के तौर पर देखा जाता है। लेकिन जब सफेद खद्दर वाला शख्स खुद को नाता अपराध की दुनिया से नाता जोड़ ले तो कहानी सिर्फ कहानी नहीं रह जाती है। यहां पर बात अंसारी परिवार ( Mukhtar Ansari- Afzal Ansari- Shivahtullah Ansari) की हो रही है। दलित- शोषित, वंचित की आवाज उठाकर सियासी दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत कर चुके अंसारी परिवार को एकाएक चुनौती एक ऐसे शख्स से मिलने लगी थी जिसका नाम कृष्णानंद राय था।

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