Kolkata Stampede: भीड़ कैसे बनती है जानलेवा और कैसे टल सकती हैं ऐसी मौतें? समझिए क्यों मचती है भगदड़

कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत ने भीड़ प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। आखिर भगदड़ कैसे होती है और भीड़ अचानक जानलेवा कैसे बन जाती है? आइए जानते हैं कि सुरक्षा इंतजामों से ऐसी त्रासदियों को कैसे रोका जा सकता है।

कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ ने एक बार फिर देश में बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भारी बारिश के बीच पंडाल के बाहर इंतजार कर रहे लोग अंदर की ओर बढ़ने लगे। इसी दौरान एक अनाउंसमेंट से भी अफरा-तफरी बढ़ने की आशंका जताई गई। भीड़ में कुछ लोग गिरे और पीछे से लगातार दबाव बढ़ने के कारण स्थिति जानलेवा हो गई। हालांकि, हादसे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन सवाल यह है कि हजारों लोगों की मौजूदगी में अचानक ऐसा क्या होता है कि लोगों के लिए चलना और सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है? क्या भगदड़ में मौतें केवल पैरों तले कुचले जाने से होती हैं? और ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या इंतजाम किए जाने चाहिए?

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कोलकाता भगदड़: बारिश और भीड़ के दबाव ने कैसे बढ़ाया हादसे का खतरा (सांकेतिक फोटो)

भगदड़ कैसे बन जाती है जानलेवा?

आमतौर पर जिसे भगदड़ कहा जाता है, उसमें कई बार असल खतरा भीड़ के अत्यधिक दबाव के कारण होता है। इसे 'क्राउड क्रश' (Crowd Crush) यानी भीड़ में कुचला जाना माना जाता है। जब किसी सीमित जगह पर बहुत ज्यादा लोग जमा हो जाते हैं, तो उनके लिए अपनी मर्जी से हिलना-डुलना भी मुश्किल हो जाता है। बड़े आयोजनों में कमजोर बैरिकेड्स, संकरे रास्ते, अस्थाई और कमजोर सीढ़ियां या केवल एक ही आने-जाने का रास्ता होना इन हादसों को न्योता देता है।

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