US-ईरान शांति वार्ता में क्या सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं वाहिदी, IRGC चीफ की भूमिका पर क्यों उठे सवाल

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने के लिए वह भी प्रयास कर रहा है। कूटनीति की जहां तक बात है तो कतर इस मामले में गंभीर खिलाड़ी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और कूटनीति की दुनिया में उसका अपना एक रसूख और इतिहास है। वह साल 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच दोहा समझौता करा चुका है।

Iran US Peace Deal: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच एक स्थायी सीजफायर एवं शांति समझौते के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। एक शांति समझौते की तलाश में अमेरिका और ईरान दोनों पाकिस्तान पहुंचे लेकिन यहां हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। हालांकि, युद्ध के साए में दोनों पक्षों ने पिछले दरवाजे से अपनी कूटनीतिक वार्ता जारी रखी। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो पाकिस्तान के जरिए एक संशोधित समझौता ड्रॉफ्ट पर फिर बातचीत हो रही है। कहा जा रहा है कि शांति समझौते के लिए इस बार दोनों पक्ष गंभीर हैं लेकिन दोनों अपने रुख पर भी अड़े हुए हैं। शांति समझौते को लेकर एक अच्छी खबर यह भी है कि मध्यस्थता की पहल में कतर भी उतर चुका है।

Ahmad Vahidi

आईआरजीसी के प्रमुख हैं अहमद वाहिदी।

शांति समझौते के लिए कतर भी कर रहा प्रयास

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने के लिए वह भी प्रयास कर रहा है। कूटनीति की जहां तक बात है तो कतर इस मामले में गंभीर खिलाड़ी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और कूटनीति की दुनिया में उसका अपना एक रसूख और इतिहास है। वह साल 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच दोहा समझौता करा चुका है। उसकी बातें हल्के में नहीं ली जातीं। इन सबके बावजूद सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई शांति समझौता हो पाएगा या नहीं। यह सवाल इसलिए है क्योंकि बीते 28 फरवरी को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई एवं वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षा अधिकारियों के मारे जाने के बाद ईरान की सत्ता में एक गतिरोध एवं लामबंदी देखने को मिली है। खासकर गतिरोध उस समय ज्यादा खुलकर आया कि ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने जब यह कहा कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची उनकी बातें कम आईआरजीसी चीफ की बातें ज्यादा सुन रहे हैं।

End of Feed