मॉनसून के लिए क्यों खतरा बना El Nino, भारत में क्या रहा है इसका इतिहास?

Super El Nino:अल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर से समय-समय पर उठने वाली ऐसी गर्मी है जो दक्षिण अमेरिका से लेकर दक्षिण एशिया तक हवा के पैटर्न को बदलता है और बारिश के पैटर्न को प्रभावित करता है।

El Nino Impact on India: 2026-27 में संभावित सुपर अल नीनो की चर्चा पहले से ही सुर्खियां बटोर रही है। 2026 की शुरुआत में वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी देखी, सतह के नीचे अधिक गर्मी जमा हो रही थी। अब हवाएं उस गर्मी को इधर-उधर ले जाने लगी है। इन सभी संकेतों ने मिलकर इस साल एक मजबूत अल नीनो की संभावना को बढ़ा दिया है। भारत में गर्मियां का दौर पहले से ही भीषण है। उत्तर प्रदेश के बांदा में 25 अप्रैल को तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस साल दर्ज किया गया सबसे अधिक तापमान है। देश के अधिकांश हिस्सों में, पिछले कुछ दिनों से दिन का अधिकतम तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है, और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कई राज्यों में लू की स्थिति की सूचना दी है।

Al nino

El Nino का कितना असर?(AI Image)

इस तरह के हालात अक्सर कमजोर मानसून की ओर इशारा करते हैं, खासकर उन वर्षों में जब अल नीनो की आशंका होती है। हर बार इसका अर्थ लगभग एक ही होता है, कमजोर मानसून और फसलों के नुकसान का डर, ऐसे देश में जहां बारिश अभी भी कृषि, जल और बिजली के स्रोत हैं। हालांकि अल नीनो को अक्सर कमजोर मानसून से जोड़ा जाता है, लेकिन यह आकलन पूरी तरह सटीक नहीं है। क्या है अल नीनो और इस साल भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है, विस्तार से जानते हैं।

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