सेना के साथ 'सेम पेज' पर होने का दावा करते थे इमरान खान, अब आ गए आमने-सामने

  • Authored by: आलोक कुमार राव
  • Updated Nov 8, 2022, 04:15 PM IST

साल 2018 में इमरान खान चुनकर जब आए तो यह कहा गया कि उनकी जीत में सेना का एक बड़ा योगदान रहा। वह इलेक्टेड नहीं बल्कि सेलेक्टेड प्रधानमंत्री हैं। कई मौकों पर इमरान खान ने भी कहा कि सेना और सरकार पहली बार 'सेम पेज' पर हैं। यानि कि देश के हित एवं अन्य मसलों पर दोनों की राय एवं सोच एक जैसी है।

Imran Khan : पाकिस्तान की सत्ता में बने रहने के लिए सेना का आशीर्वाद जरूरी होता है। सेना की खिंची हुई लाइन से हटकर जिस किसी हुक्मरान ने अलग राह पकड़ने की कोशिश की या उसे चुनौती देते हुए दिखाई दिया तो उसे अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी या बुरे नतीजों का सामना करना पड़ा। चाहे वह लियाकत अली खान हों, जुल्फिकार अली भुट्टो हों, बेनजीर भुट्टो हों, नवाज शरीफ हों या अब इमरान खान। एक समय ये सभी नेता सेना को प्यारे रहे लेकिन सत्ता का बुखार चढ़ने पर इन नेताओं ने जब चुनौती दी तो सेना ने इनके पर कतर दिए।

imran khan

सेना के साथ इमरान खान का टकराव बढ़ गया है।

कई बार 'सेम पेज' पर होने का दावा किया

साल 2018 में इमरान खान चुनकर जब आए तो यह कहा गया कि उनकी जीत में सेना का एक बड़ा योगदान रहा है। वह इलेक्टेड नहीं बल्कि सेलेक्टेड प्रधानमंत्री हैं। कई मौकों पर इमरान खान ने भी कहा कि सेना और सरकार पहली बार 'सेम पेज' पर हैं। यानि कि देश के हित एवं अन्य मसलों पर दोनों की राय एवं सोच एक जैसी है। पीएम बनने के बाद इमरान ने कई बार सेना प्रमुख की तारीफ की। सरकार एवं सेना की ये नजदीकियां पाकिस्तानी आवाम को भी काफी रास आईं लेकिन समय के बहाव में सत्ता की हनक एवं गुरूर इमरान खान पर हावी होने लगे। बीते एक साल में सेना के खिलाफ उनकी बयानबाजी तेज हुई और वे उसके निशाने पर आ गए।

End of Feed