ईरान की मदद से लाल सागर में हूतियों की बड़ी बढ़त, क्यों बढ़ा सऊदी से लेकर दुनिया तक खतरा?

यमन में हूती विद्रोहियों ने ईरानी सेना के सीधे मार्गदर्शन में महज 48 घंटे के भीतर लाल सागर के रणनीतिक तटीय इलाके और मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया है। इस ऑपरेशन में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सलाहकारों ने रणनीति बनाने से लेकर सैटेलाइट इंटेलिजेंस और कम्युनिकेशन हैकिंग तक में हूतियों की मदद की, जिससे अमेरिका और सऊदी अरब के क्षेत्रीय हितों को बड़ा झटका लगा है।

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच यमन से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यमन के हूती विद्रोहियों ने महज 48 घंटे के भीतर लाल सागर के लगभग पूरे रणनीतिक तटीय इलाके और बेहद अहम मोखा (Mokha) बंदरगाह पर कब्जा जमा लिया है। यमन की सऊदी समर्थित सरकारी सेना के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

Yemen Civil War Explainer

मोखा बंदरगाह का गिरना और सऊदी की नाकेबंदी (Photo: AI Generated/Newsroom Verified)

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि साल 2014 से चल रही इस जंग में हूतियों ने अचानक इतनी तेजी से इतना बड़ा जमीनी इलाका कैसे हथिया लिया? AP की एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने यह जंग अकेले नहीं जीती, बल्कि मैदान-ए-जंग में उनके साथ ईरान के 'इरमी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) के सीनियर सैन्य सलाहकार मौजूद थे।

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