Imran Khan Vs Asim Munir: पाकिस्तान का राजनीतिक परिदृश्य लगातार उलझता जा रहा है। भले ही शहबाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री हों, लेकिन आर्मी चीफ आसिम मुनीर इतने ताकतवर हो गए हैं कि उन्हें चुनौती देने की स्थिति में कोई नहीं दिख रहा है। लेकिन आसिम मुनीर को एक ऐसा शख्स लगातार चुनौती दे रहा है, जो पिछले कुछ वर्षों से जेल में बंद है। हम बात कर रहे हैं पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की। आसिम मुनीर का संसद, न्यायपालिका और कूटनीति में व्यापक प्रभाव है, लेकिन रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार अपनी ताकत का अहसास करवा रहे हैं।
पाकिस्तान में इमरान खान और आसिम मुनीर की जंग
जेल में बंद इमरान दे रहे चुनौती
जेल में बंद होने के बावजूद, इमरान खान को जमीनी कार्यकर्ताओं, प्रवासी समुदाय और एक मजबूत डिजिटल नेटवर्क से समर्थन मिलता है, जो उनकी लड़ाई को जिंदा रखे हुए है। फिलहाल आर्मी चीफ मुनीर सत्ता लगातार अपनी ताकत बढ़ाते जा रहे हैं, वहीं इमरान खान सलाखों के पीछे से पाकिस्तान के राजनीतिक भविष्य को आकार दे रहे हैं। दोनों के बीच किस तरह ये लड़ाई छिड़ी हुई है और कैसे शह-मात का खेल जारी है, समझने की कोशिश करते हैं।
इमरान खान ने किया देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान
इस सप्ताह, इमरान खान ने मुहर्रम के बाद देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है, जिसका उद्देश्य लामबंदी को पुनर्जीवित करके कार्यकर्ताओं में जोश भरना है। इमरान ने ऐसे वक्त पर संघर्ष का बिगुल फूंका है जब मुनीर की ताकत अपने चरम पर है। उधर, इमरान ने बढ़ती महंगाई, दमन और राजनीतिक व्यवस्था और लोकतंत्र को दरकिनार करने की कोशिशों के बीच संघर्ष का दम भरकर मुनीर को चुनौती दे डाली है।
मुनीर की कूटनीतिक चाल और अमेरिका की जी-हुजूरी
दो सप्ताह पहले मुनीर ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक गोपनीय बैठक की थी। माना जा रहा है कि ये चर्चा इमरान खान की किस्मत और पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता पर केंद्रित थी। इसके तुरंत बाद, सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की आरक्षित सीटों को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सत्तारूढ़ गठबंधन को दे दिया, जिससे उसे संसद में दो-तिहाई बहुमत मिल गया।
इमरान समर्थकों का मजबूत डिजिटल नेटवर्क
आलोचकों ने इस कानूनी फैसले को फरवरी 2024 के आम चुनावों से लोकप्रिय जनादेश को प्रभावी रूप से निष्प्रभावी करने वाला बताया है। मुनीर पाकिस्तान के दूत के रूप में वाशिंगटन, रियाद और बीजिंग की राजनयिक यात्राएं जारी रखे हुए हैं। वहीं, पीटीआई की राजनीतिक गतिविधियां विदेश में शिफ्ट हो गई हैं। पार्टी का अभियान अब यूके, उत्तरी अमेरिका और खाड़ी में स्थित एक व्यापक ऑनलाइन स्वयंसेवी नेटवर्क द्वारा संचालित किया जा रहा है। पीटीआई यूट्यूब, टेलीग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए अन्याय, सेंसरशिप और जनादेश की चोरी के अपने संदेश को बनाए रखे हुए है।
मुनीर का बढ़ता अंतरराष्ट्रीय कद
हाई-प्रोफाइल कूटनीति के जरिए मुनीर का बढ़ता वैश्विक कद खतरे की ओर भी इशारा करता है। इतिहास बताता है कि अयूब खान, जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ सहित पाकिस्तान के पिछले सैन्य शासकों ने अपनी तानाशाही के दौरान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के समर्थन का भरपूर मजा उठाया। लेकिन आखिर में घरेलू असंतोष के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इमरान खान द्वारा मुहर्रम के बाद विरोध प्रदर्शन करने और बढ़ती आर्थिक मुश्किलों के कारण राजनीतिक असंतोष को बढ़ावा देने के साथ, देश पर मुनीर के नियंत्रण को जल्द ही बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता रहा तो पुराने दौर जैसे हालात फिर लौट सकते हैं।
मुनीर और इमरान के बीच असली मुकाबला
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार में वास्तविक अधिकार का अभाव साफ दिखता है। पीएम शहबाज, आसिम मुनीर के आगे नतमस्तक नजर आते हैं। जिस तरह बिना युद्ध किए ही आसिम मुनीर ने फील्ड मार्शल का तमगा हासिल कर लिया, उसने सभी को हक्का-बक्का कर दिया है। भारत के हाथों बुरी तरह हार और भारी सैन्य नुकसान के बाद भी मुनीर को जिस तरह फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई, वो एक हास्यास्पद और शर्मनाक घटना बन गई है। मुनीर एक फेल्ड मार्शल साबित हुए हैं। इसके बावजूद इस वक्त मुनीर के पास बेजोड़ संस्थागत नियंत्रण है और पीएम शहबाज उनकी मुट्ठी में नजर आते हों, लेकिन इमरान खान की ताकत भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। जेल में रहने के बावजूद इमरान के लिए समर्थन साफ दिखता है, उनकी पार्टी एकजुट है और वह खुद झुकने को बिल्कुल तैयार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में अब पाकिस्तान में मुख्य मुकाबला इमरान और मुनीर के बीच ही रह गया है। बाजी किसके हाथ लगेगी, ये देखने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
