What is Blood Money: यमन में एक हत्या के मामले में केरल मूल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि मृतक के परिजन मुआवजा लेने के लिए सहमत हो सकते हैं जिसके बाद निमिषा की जान बच सकती है। इस मामले पर भारत में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई और केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि नर्स निमिषा प्रिया को यमन में मौत की सजा से बचाने के लिए ब्लड मनी (Blood Money) का भुगतान ही एकमात्र विकल्प बचा है। कई इस्लामी देशों में जारी न्याय प्रणाली, शरिया कानून के तहत इस तरह के भुगतान की इजाजत देती है जिसमें आरोपी मृतक के परिवार को बड़ा मुआवजा देता है। समझने की कोशिश करते हैं कि यह किस तरह काम करता है।
क्या होता है ब्लड मनी जिसे देकर बच सकती है निमिषा प्रिया?
क्या है ब्लड मनी?
शरिया कानून में प्रतिशोध की अवधारणा को 'किसास' (Qisas) या 'आंख के बदले आंख' के सिद्धांत पर आधारित माना गया है। हत्या के मामले में इसका मतलब है कि पीड़ित के परिजन अपराधी के लिए सजा के तौर पर मौत की मांग कर सकते हैं। हालांकि, शरिया पीड़ित के परिजनों को 'दिया' (Diya), यानी मुआवजा या क्षतिपूर्ति देने की भी अनुमति देता है। इसी को ब्लड मनी कहा जाता है। 'दिया' की ऐसे मामलों में इजाजत है जहां पीड़ित के परिजन 'किसास' के अपने अधिकार को छोड़ देते हैं और ब्लड मनी के लिए समझौता करने पर सहमत हो जाते हैं। यह अधिकार पीड़ित के परिजनों को ही दिया जाता है और राज्य या सरकार द्वारा उनकी ओर से इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। 'दिया' के तहत मृतक के परिजन आरोपी से बड़ी रकम की मांग कर सकते हैं। निमिषा प्रिया को बचाने की कोशिशों के तहत मृतक तलाल अब्दो मेहदी के परिजनों से अपील की जा रही है कि वे ब्लड मनी यानी 'दिया' लेने के लिए सहमत हो जाएं। अलग-अलग देश, कानूनी क्षेत्राधिकार और पीड़ित की हैसियत के आधार पर 'दिया' की अलग-अलग रकम निर्धारित की जाती है।
क्या ब्लड मनी देने के बाद दोषी छूट जाते हैं?
हालांकि 'दिया' देने के बाद आरोपी मौत की सजा से बच जाता है, लेकिन यह बहस का विषय है कि क्या पीड़ित के परिवार द्वारा 'दिया' स्वीकार करने के बाद आरोपी पूरी तर बच जाता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस्लामी न्यायशास्त्र ने इस बिंदु पर स्पष्ट रूप से बात नहीं कही गई है। हालांकि, ऐसे उदाहरण हैं जहां अपराधी को मौत की सजा से तो बच गया, लेकिन 'दिया' अदा करने के बाद भी उसे जेल में रखा गया। केरल के अब्दुल रहीम का मामला ऐसा ही एक उदाहरण है।
सऊदी अरब में अपने नियोक्ता के बेटे की हत्या के आरोप में दोषी ठहराए गए रहीम ने फंडरेजिंग के जरिए जुटाई गई भारी राशि यानी ब्लड मनी का भुगतान करने के बाद पीड़ित के परिवार से क्षमादान हासिल कर लिया था। हालांकि, इसके बाद भी मामला बंद नहीं हुआ और उसे 20 साल जेल की सजा सुनाई गई। फैसले में जेल में बिताए गए समय को भी ध्यान में रखा गया। हालांकि अपराध 2006 में हुआ था और क्षमादान 2018 में मिला, उसके अगले साल ही रिहा होने की उम्मीद है।
कितने देश शरिया कानून का पालन करते हैं?
दुनिया में लगभग 50 मुस्लिम बहुल देश हैं और माना जाता है कि उनमें से अधिकांश ने अपनी कानूनी प्रणालियों में शरिया कानून की बातों को शामिल किया है। यहां तक कि ऐसे कुछ देशों में कुछ पारिवारिक या व्यक्तिगत कानून शरिया पर आधारित मिल जाते हैं, जिसने धर्मनिरपेक्ष न्यायशास्त्र को चुना हो। लेकिन शरिया कानूनी सिद्धांतों को किस हद तक प्रभावित करता है, यह व्यापक रूप से अलग-अलग हो सकता है। इसके अलावा, सभी मुस्लिम बहुल देशों में व्यभिचार, बलात्कार, समलैंगिकता, चोरी और हत्या जैसे अपराधों के लिए दी जाने वाली कठोर सजा, जिसे हुदूद कहा जाता है, लागू नहीं की जा सकती।
