SSC Controversy Explained: छात्रों का कहना है कि नौकरी मांगना क्या कोई गुनाह है? यही तो एक सपना था, जिसे पूरा करने के लिए वे अपने घर से निकले थे, लेकिन सिस्टम ने उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। आज देश की सड़कों पर हजारों की संख्या में नौजवान एकत्र हैं। ये परीक्षा संचालन वेंडर कर्मचारी चयन आयोग (Staff Selection Commission) पर परीक्षाओं में धांधली, अनियमितताओं और लेट लतीफी का आरोप लगाकर अपनी आवाज उठा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने सालों से इस इंतजार में दिन रात खपाए हैं कि उनकी मेहनत का फल मिलेगा। वो यही आशा उन संस्थाओं से भी रखते हैं, जिन्हें परीक्षा में पारदर्शिता के लिए चुना गया है, ताकि उनके सपनों को यूं ही न कुचला जाए! इन्हीं सब समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर एकत्र हुए छात्रों ने पुलिस प्रशासन पर बदसलूकी और लाठियां बरसाने के आरोप लगाए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि एक ब्लैक लिस्टेड की गई कंपनी को परीक्षा कराने का टेंडर जारी कर दिया गया। लिहाजा, ऐसी बैकग्राउंड वाली कंपनी पर हमारा भविष्य तय करने वाली परीक्षाओं का भरोसा कैसे किया जा सकता है? आरोप यह भी है कि पूर्व परीक्षा सेवा प्रदाता है टीसीएस (TCS) कथित तौर से इस धांधली और गड़बड़ी में शामिल है। लिहाजा छात्र उसे हटाने की मांग पर अड़े हैं और देशभर के विभिन्न हिस्सों में प्रोटेस्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम अपराधी नहीं हैं, हम बेहतर व्यवस्था की मांग करते हैं। आइये जानते हैं कि आंदोलन की असल वजह क्या है?
एसएससी के खिलाफ जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन
आंदोलन की मुख्य बातें
- परीक्षा केंद्र में गड़बड़ी
- परीक्षा केंद्र पर सिस्टम क्रैश होने की समस्या
- बार-बार परीक्षाओं का रद्द होना
- परीक्षा केंद्रों का गलत आवंटन और टेक्निकल खामियां
- छात्रों के साथ दुर्व्यहार का आरोप
- TCS पर गड़बड़ी फैलाने के गंभीर आरोप
पुलिस ने बरसाईं लाठियां
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) सलेक्शन पोस्ट फेज-13 भर्ती परीक्षा में गड़बडी के खिलाफ दिल्ली स्थित जंतर-मतर में एकत्र छात्रों ने जिम्मेदारों से भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही की मांग की तो पुलिस ने छात्रों को विरोध प्रदर्शन बंद करने की मांग की। छात्र इस दौरान नारेबाजी कर रहे थे, लिहाजा पुलिस ने कुछ छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षकों को हिरासत में ले लिया। छात्रों का आरोप है कि उन पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं गई। उनका कहना है कि सरकार इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है।
क्या है मामला?
न्यूज एजेंसी पीटीआई/भाषा के हवाले से छात्रों ने एसएससी चयन पोस्ट फेज-13 भर्ती परीक्षा में कथित कुप्रबंधन का आरोप लगाया और गुरुवार को देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतर आए। छिटपुट आंदोलन के बाद देशभर में नाराज अभ्यर्थी और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थानों से जुड़े शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही और सुधार की मांग को लेकर 'दिल्ली चलो' आह्वान के तहत जंतर-मंतर पर एकत्र हुए। प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों और टीचर्स का कहना है कि प्रशासनिक चूक, तकनीकी खराबी और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ओर से बल प्रयोग किया गया।
दरअसल, 24 जुलाई से शुरू हुई और 1 अगस्त को समाप्त होनी थी। छात्रों ने आरोप लगाया कि एसएससी परीक्षाएं आयोजित करने में कई समस्याएं है, जो प्रश्नपत्र दिए गए, उनमें कुछ गलत थे। कुछ सवाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किए गए, जो प्रश्न एक दिन पूर्व छात्रों को मिले थे, वही प्रश्न दूसरे दिन छात्रों को मिले, जो कथित गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं। छात्रों ने कहा कि एसएससी परीक्षा में अचानक रद्द होने, सर्वर क्रैश होने, सिस्टम के ठीक से काम न करने और परीक्षा केंद्रों के उम्मीदवारों के घरों से 500 किलोमीटर दूर स्थित होने की कई शिकायतें की गईं, इसके बजाय सीबीटी चयन प्रक्रिया ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया है। छात्र सिस्टम में त्वरित सुधार और पारदर्शिता की मांग पर अड़े हैं।
परीक्षा केंद्रों पर बाउंसर क्या कर रहे?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि उन्हें कथित तौर पर दूर-दराज स्थित परीक्षा केंद्रों पर भेजा जा रहा है और वहां जाकर पता चलता है कि परीक्षा रद्द कर दी गई है, जिससे उनके पैसे और समय दोनों बर्बाद हुए। तैयारी के लिए खर्च किए गए समय के बर्बाद होने का कौन जिम्मेदार है? कई छात्र और छात्राओं का आरोप है कि परीक्षा केंद्र के बाहर बाउंसर तैनात किए गए। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र दूरस्थ या असुरक्षित स्थानों पर स्थित थे। पीटीआई को दिए गए एक जवाब में छात्र ने बताया कि जिस कंप्यूटर पर उसे परीक्षा देनी थी उसका 'माउस' काम नहीं कर रहा था और सिस्टम हैंग कर रहा था।
कितनी शिकायतें?
पीटीआई/भाषा के लेख के मुताबिक, एसएससी निदेशक के साथ एक बैठक के दौरान अधिकारियों ने परीक्षा से संबंधित 55,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त होने की बात स्वीकार की। ऐसे में तमाम शिक्षकों का कहना है कि अगर 3 लाख छात्र हैं और 55,000 ने समस्याएं दर्ज कराई हैं, तो यह अपने आप में बहुत कुछ कहता है। 30 लाख अभ्यर्थियों वाली एसएससी-सीजीएल परीक्षा 13 अगस्त से शुरू होने वाली है। इन टूटी-फूटी प्रणालियों के साथ एसएससी इसे कैसे प्रबंधित करेगा?
TCS पर क्या आरोप?
एक लिखित शिकायत के अनुसार, TCS ने परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों को धन देकर प्रभावित किया। उन्हें निर्देशित किया गया कि वे परीक्षा केंद्र समय पर न खोलें और छात्रों को जानबूझकर देर से प्रवेश दें, ताकि वो समय से अपने प्रश्न हल न कर पाएं। एक प्रमुख परीक्षा केंद्र प्रभारी ने अपने लेटरहेड पर लिखित शिकायत दी है कि उन्हें धमकी दी गई और कहा गया कि अगर तुम नहीं मानोगे तो दूसरे सेंटर से करवा लेंगे। हालांकि, TCS, जो पहले इस प्रक्रिया पर पूर्ण नियंत्रण रखता था, अपना ठेका खो चुका है। ऐसे स्थिति में छात्रों का कहना है कि क्या किसी कॉर्पोरेट को यह अधिकार है कि वह मुनाफे के लिए छात्रों का भविष्य बर्बाद करे?
ट्विटर पर हैशटैग ट्रेंड
इस बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शन का समर्थन करने के मामले ने बड़ी तेजी पकड़ी। 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) #SSC_System_Sudharo, #SSCMisManagement, और #SSCVendorFailure जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। देशभर में परीक्षार्थियों और शिक्षकों ने एसएससी और कार्मिक मंत्रालय से तत्काल हस्ताक्षेप की मांग की। इस मामले में उच्च जांच की मांग की जा रही है।
