Explained: जाति जनगणना पर अब आगे क्या होने वाला है? जानिए इसका इतिहास और 5 प्रमुख सवालों के जवाब

क्या आप जानते हैं कि जाति जनगणना का इतिहास क्या है? इसके अलावा राजनीति में इसे लेकर तमाम मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। आपको जाति जनगणना का मौजूदा महत्व भी जानना चाहिए। आखिरी बार देश भर में जाति गणना 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) के तहत की गई थी। उसके बाद से अब तक जगगणना नहीं हुई है।

Caste Census: आजादी से पहले भारत में 1881 से 1931 के बीच की गई जनगणना के दौरान सभी जातियों की गणना की गई थी, लेकिन 1951 में स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना के समय तत्कालीन सरकार ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों को छोड़कर अन्य जातियों की गणना नहीं कराने का निर्णय लिया। एक दशक बाद 1961 में, केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा कि वे चाहें तो अपने स्तर पर सर्वेक्षण कराएं और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूचियां तैयार करें। आपको बताते हैं कि भारत में जनगणना का क्या इतिहास है।

Explained Caste Census

जाति जनगणना से जुड़े 5 अहम सवाल।

भारत में जनगणना का इतिहास

भारत दुनिया के उन बहुत कम देशों में से एक है, जिसका हर दस साल बाद जनगणना करने का गौरवशाली इतिहास है। भारतीय जनगणना का इतिहास बहुत लंबा है। सबसे पुराने साहित्य ‘ऋग्वेद’ से पता चलता है कि 800-600 ईसा पूर्व के दौरान किसी तरह की जनसंख्या गणना की जाती थी। 321-296 ईसा पूर्व के आसपास लिखे गए कौटिल्य के अर्थशास्त्र में कराधान के उद्देश्य से राज्य की नीति के उपाय के रूप में जनगणना पर जोर दिया गया था।

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