तो क्या बैसारन घाटी तक पहुंचने में अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन ने की आतंकियों की मदद? रिपोर्ट में खुलासा

Alpine Quest Application : रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने इन आतंकियों को अल्पाइन क्वेस्ट एप का ऑफलाइन वर्जन दिया है। यह वर्जन किसी सेल्युलर फोन के नेटवर्क के बिना काम करता है। यह एक नेविगेशन एप है और पेशेवर ट्रेकर अधिकतर इसका इस्तेमाल करते हैं।

Alpine Quest Application : पहलगाम में इतना भीषण आतंकवादी हमला और इंटेलिजेंस में चूक कैसे हो गई, इस पर भी बातें हो रही हैं। अब तक की जांच से यह बात तो साफ हो गई है कि सैलानियों के खून से बैसारन घाटी को लहूलुहान करने वाले आतंकियों में से कुछ पाकिस्तानी और और कुछ स्थानीय हैं। इन्हें अत्याधुनिक हथियार चलाने, सुरक्षाबलों से बचने का प्रशिक्षण भी मिला हुआ था। बैसारन घाटी में सैलानियों की संख्या कब सबसे ज्यादा होती है, इलाके में सुरक्षाबलों के मूवमेंट और पोस्ट्स के बारे में इन्हें बताया गया था। इन्हें पूरी तैयारी के साथ हमला करने के लिए भेजा गया था।

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पहलगाम में 22 अप्रैल को हुआ हमला।

स्लीपर सेल ने की आतंकियों की मदद

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि भारत में घुसपैठ करने के बाद स्थानीय स्लीपर सेल ने इनके रुकने, छिपने और खाने-पीने का बंदोबस्त किया होगा क्योंकि एनआईए ने मार्च में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि 'समझा जाता है कि आतंकवादी कठुआ, उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, रियासी, रजौरी, पुंछ और कश्मीर घाटी में दाखिल हो गए हैं।' कश्मीर में खुफिया तंत्र से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि 'अभी घाटी में 55 से 60 अति प्रशिक्षित विदेशी आतंकियों के होने का अनुमान है।'

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