चाचा शिवपाल की सपा में भूमिका हुई तय, वसंत पंचमी के बाद संगठन में मिलेगा महत्वपूर्ण पद

  • Authored by: मनीष यादव
  • Updated Jan 19, 2023, 08:48 PM IST

अगले बरस होने वाले आम चुनावों को देखते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) ने अब संगठन को मजबूत कर संघर्ष की राह अपनाने का फैसला कर लिया है। परंपरागत वोट बैंक के साथ-साथ अति पिछड़ी और गैर जाटव दलित जातियों को जोड़ने की रणनीति तय की है। शिवपाल सिंह यादव को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। 26 जनवरी के बाद उन्हें महत्वपूर्ण पद दिया जाएगा।

अगले बरस होने वाले आम चुनावों को देखते हुए सपा ने अब संगठन को दुरस्त कर संघर्ष की राह अपनाने का फैसला कर लिया है शिवपाल यादव को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। सपा हाईकमान ने वोट बैंक के समीकरण को दुरस्त करने के लिए परंपरागत वोट बैंक के साथ-साथ अति पिछड़ी और गैर जाटव दलित जातियों को जोड़ने की रणनीति तय की है। मैनपुरी चुनाव के नतीजों ने यूपी की सियासत को कई नजरिए से प्रभावित किया हैं। बीजेपी के समझ में आ गया है मैनपुरी समाजवादियों का मजबूत गढ़ है इसे ढहाना इतना आसान नहीं है। वहीं सपा की अंदरूनी सियासत को भी मैनपुरी चुनाव ने एकदम बदल कर रख दिया। जिन चाचा शिवपाल के बारे में सवाल पूछना अखिलेश यादव को अखर जाता था वही अखिलेश जसवंतनगर में मंचों से कह रहे थे "चाचा विधायक है हमारे" । खैर ये बात चुनावों की थी गुजर गई और चाचा भतीजे का विवाद भी अब पीछे छूट गया हैं।

Shivpal Yadav

सपा में शिवपाल यादव को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

दरअसल अब सपा में सियासी भविष्य की बात हो रही है शिवपाल की भूमिका के साथ सपा अपनी ताकत कैसे बढ़ाएं इसको लेकर मनन हो रहा है। विधानसभा में हार के बाद अखिलेश ने केंद्र के बजाय यूपी में ही बने रहने का फैसला किया था अखिलेश अपने विधायकों को बड़ी संख्या के साथ मजबूत सपा मजबूत विपक्ष का मैसेज देना चाहते थे। ऐसे में नेता प्रति पक्ष का पद किसी दूसरे को देने के बजाय अखिलेश ने अपने पास रखा। पहले शिवपाल को नेता विपक्ष बनाने पर सहमति बनी थी जिसमे शिवपाल को सुरक्षा भी मिल जाती और उनका बेहतर समायोजन भी हो जाता। लेकिन शिवपाल की सांगठनिक क्षमता को देखते हुए उनके राष्ट्रीय स्तर पर महासचिव पद की जिम्मेदारी देने का फैसला हुआ है।

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