Caste Census: बिहार विधानसभा चुनाव-2025 से पहले आगामी जनगणना में केन्द्र सरकार ने जाति जनगणना कराने का बड़ा फैसला लिया है। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें सरकार ने अगले जनगणना में जातियों की गणना कराने का फैसला किया है। इस बीच कांग्रेस ने बुधवार को आगामी जनगणना में जाति गणना को शामिल करने के केन्द्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। जानकारी के अनुसार ये वही जाति गणना है जिसकी मांग कांग्रेस सांसद राहुल गांधी बार-बार करते रहे हैं। वहीं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि हम पिछले कई सालों से केन्द्र सरकार से जाति जनगणना कराने की मांग कर रहे है। सरकार के फैसले का हम समर्थन करते हैं, लेकिन हमारे कुछ मांग है। हम चाहते हैं कि सरकार जाति जनगणना कराने की तारीख बताए। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जनगणना कब और कैसे होगी। राहुल गांधी ने कहा कि केन्द्र सरकार को तेलंगाना मॉडल को अपनाना चाहिए। दरअसल, राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार को तेलंगाना सरकार की तरह तेज, पारदर्शी और समावेशी जाति सर्वे मॉडल अपनाने चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि तेलंगाना ने 50 फीसदी आरक्षण की सीमा तोड़ दिया है। हम चाहते हैं कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी हटे। प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किया जाए।
समझिए बिहार चुनाव में किसके लिए संजीवनी साबित होगी जाति जनगणना
जाति जनगणना पर कांग्रेस के कई नेताओं ने दी प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि एआईसीसी सम्मेलन के दौरान 9 अप्रैल 2025 को अहमदाबाद में सामाजिक न्याय पर कांग्रेस के प्रस्ताव में कहा गया था कि जाति जनगणना हो। सरकार ने अब फैसला लिया है, देर आए दुरुस्त आए। सामाजिक न्याय की नींव को और मजबूत करने के लिए, जाति आधारित जनगणना आवश्यक है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस ने लगातार जाति जनगणना की मांग उठाई थी, जिसके सबसे मुखर पक्षधर राहुल गांधी रहे। आज मोदी सरकार ने Census के साथ जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की है। ये सही कदम है जिसकी हम पहले दिन से मांग कर रहे थे। मैंने कई बार इसे संसद में उठाया और प्रधानमंत्री जी को पत्र भी लिखा। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने भी कई बार जातिगत जनगणना की मांग की है और लोकसभा चुनाव में ये अहम मुद्दा बना।
वही भाजपा ने जाति जनगणना पर सहमति जताकर राहुल गांधी को उनके मुख्य राजनीतिक हथियार से ही वश में करने की कोशिश की है। कांग्रेस के लिए 2024 के मुख्य चुनावी मुद्दे जाति जनगणना और सामाजिक न्याय ने पार्टी को आगे बढ़ाया और 2024 के लोकसभा चुनावों में अपनी संख्या दोगुनी करने में मदद की, 2019 में 52 के मुकाबले 99 सीटें जीतीं। भाजपा राहुल गांधी की ओबीसी संचालित राजनीति को नुकसान पहुंचाना चाहती है। राहुल गांधी ने अपने पार्टी नेताओं से साफ कहा कि पार्टी ऊंची जाति के दलितों और मुसलमानों तक पहुंच बनाने में लगी रही, लेकिन ओबीसी से उसका संपर्क टूट गया। उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा कि वे अपना ध्यान ओबीसी पर केंद्रित करें।
यह हमारी, समाजवादियों और लालू यादव की जीत है- तेजस्वी यादव
सरकार के फैसले पर राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि यह हमारी 29 साल पुरानी मांग थी। यह हमारी, समाजवादियों और लालू यादव की जीत है। इससे पहले बिहार के सभी दलों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी, लेकिन उन्होंने हमारी मांग को अस्वीकार कर दिया। कई मंत्रियों ने इससे इनकार किया, लेकिन यह हमारी ताकत है कि उन्हें हमारे एजेंडे पर काम करना है। बिहार के पूर्व सीएम और RJD नेता तेजस्वी यादव ने केंद्रीय कैबिनेट के फैसले पर कहा कि जाति गणना आगामी जनगणना का हिस्सा होगी।
उन्होंने आगे कहा कि जब हमने बिहार में जातिगत सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आरक्षण को बढ़ाकर 65% किया था, तब भी हमने केंद्र सरकार से मांग की थी कि इस प्रावधान को अनुसूची 9 में शामिल किया जाए, लेकिन अब तक सरकार ने ऐसा नहीं किया है। जातिगत जनगणना परिसीमन से पहले होनी चाहिए और फिर जिस तरह दलितों, एससी, एसटी और आदिवासियों के लिए संसद और राज्य विधानसभाओं में आरक्षित सीटें हैं, उसी तरह ओबीसी और अति पिछड़े वर्गों के लिए भी आरक्षित सीटें होनी चाहिए।
वही अगर बिहार विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बात की जाए तो पाएंगे कि जाति सर्वेक्षण कराने के केन्द्र सरकार के कदम से चुनावी राज्य बिहार में जाति आधारित राजनीति पर सीधा असर पड़ेगा। इससे भाजपा को यह संदेश देने में मदद मिलेगी कि पार्टी सामाजिक न्याय के लिए हमेशा खड़ी है और जब बात गरीबों और पिछड़े समुदायों के कल्याण की आती है तो वह अपनी बात पर अमल भी करती है।
