BMC Mayor: शिंदे की रणनीति, फडणवीस की चुप्पी और मुंबई-ठाणे का सत्ता संतुलन

महाराष्ट्र में बीएमसी मेयर पद को लेकर दिख रही राजनीतिक हलचल दरअसल भीतर पहले से तय संतुलन का हिस्सा है। शिंदे गुट की पहल, फडणवीस की रणनीतिक चुप्पी और बीजेपी का संख्याबल संकेत देता है कि मुंबई में मेयर बीजेपी का ही होगा, ठाणे में शिवसेना (शिंदे) को सत्ता में संतुष्ट किया जाएगा।

मुंबई महानगरपालिका के मेयर पद को लेकर जिस राजनीतिक हलचल को बाहर से देखा जा रहा है, वह दरअसल जितनी दिख रही है, उतनी है नहीं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा नवनिर्वाचित 29 पार्षदों को तीन दिनों के लिए ताज लैंड्स एंड में ठहराना औपचारिक तौर पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम बताया गया, लेकिन महाराष्ट्र की सत्ता-राजनीति में ऐसे किसी भी आयोजन को सिर्फ प्रशिक्षण मान लेना भोलेपन से कम नहीं होगा। असली कहानी आयोजन की प्रकृति में नहीं, उसकी टाइमिंग में छिपी है।

Shinde-devabhau BMC Mayor post.

बीएमसी मेयर पद को लेकर फडणवीस के दावोस से लौटने पर ही होगा फैसला

यह तीन दिन का कार्यक्रम 21 तारीख को समाप्त हो रहा है, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 24 जनवरी तक दावोस में हैं। यानी जब तक फडणवीस मुंबई में उपस्थित नहीं होंगे, तब तक मेयर को लेकर कोई ठोस राजनीतिक निर्णय सामने नहीं आएगी। सत्ता के जानकार इसे संयोग नहीं मानते, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति बताते हैं, जिसके जरिए शिंदे गुट यह संदेश देना चाहता है कि वह सिर्फ संख्या में छोटा साझेदार नहीं, बल्कि सत्ता के समीकरणों में एक आवश्यक घटक है।

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