Mansoon 2026 : देशभर में मानसूनी बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, कहीं अनुमान से अधिक तो कहीं कम वर्षा रिकॉर्ड की जा रही है। आईएमडी की मानें तो इस सीजन दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) कमजोर रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक जून से 16 अगस्त की अवधि में सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। हालांकि, इसके विपरीत पूर्वोत्तर में राज्यों में अच्छी बारिश हुई। यानी कुल 27 फीसदी इजाफा देखा गया। इधर, अगस्त माह में दिल्ली-एनसीआर में सामान्य से अधिक वर्षा हुई, जो काफी अच्छे संकेत हैं। मानसून की अच्छी स्थिति खरीफ फसलों के लिए भी अहम है, क्योंकि धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी फसलें मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहती हैं। पर्याप्त बारिश वाले क्षेत्रों में फसलों को फायदा मिल सकता है, वहीं बारिश की कमी वाले इलाकों में खरीफ फसलों की पैदावार और सिंचाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है। लेकिन अच्छे मानसून से रबी की फसलों के लिए भी सिंचाई का ढांचा तैयार होगा।
अगस्त में कितनी बारिश (फोटो-AI)
.2026 में सामान्य से कम मानसून का पूर्वानुमान
स्काईमेट वेदर ने कहा कि वर्ष 2026 में सामान्य से कम मानसून रहने का अनुमान जताया था। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के शुरुआती चरण में ही इसकी रफ्तार लगभग थम गई थी। जून का महीना बेहद कमजोर रहा और इस दौरान दीर्घकालिक औसत (LPA) की तुलना में सिर्फ 65% बारिश दर्ज की गई।
जुलाई में मानसून ने तेजी से वापसी की, लेकिन दूसरे सप्ताह में ‘ब्रेक मानसून’ की स्थिति ने बारिश पर ब्रेक लगा दिया। हालांकि, महीने के दूसरे हिस्से में मानसून का प्रदर्शन संतोषजनक रहा और जुलाई सामान्य बारिश के करीब समाप्त हुआ। 1 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच मानसून के आधे सीजन में देशभर में LPA के मुकाबले 13% बारिश की कमी दर्ज की गई।
अगस्त में देश के चारों समरूप मौसम क्षेत्रों में बारिश का वितरण असमान रहने की संभावना है। स्काईमेट के अनुमान के मुताबिक अगस्त का अंत LPA के मुकाबले 16% बारिश की कमी के साथ हो सकता है। सितंबर में भी LPA के मुकाबले करीब 20% बारिश की कमी रहने का अनुमान है।
अल नीनो मजबूत
स्काईमेट वेदर के अनुसार, अल नीनो मजबूत हो रहा है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में वायुमंडलीय और समुद्री परिसंचरण के बीच मजबूत तालमेल शक्तिशाली अल नीनो की संभावना बढ़ा रहा है। सितंबर की शुरुआत में इसके भारी से भारी श्रेणी में जाने की संभावना है। ‘सुपर अल नीनो’ की स्थिति आमतौर पर कमजोर मानसून की संभावना बढ़ाती है। स्काईमेट वेदर ने 2026 के मानसून के अपने पूर्वानुमान को संशोधित कर LPA का 85% कर दिया है। इसका मतलब है कि पूरे मानसून सीजन में सामान्य से काफी कम बारिश होने की संभावना है।
| सीजनल बारिश (LPA के मुकाबले) | श्रेणी |
| 90% से कम | सूखा |
| 90% से 95% | सामान्य से कम बारिश |
| 96% से 104% | सामान्य मानसून |
| 105% से 110% | सामान्य से अधिक बारिश |
| 110% से ज्यादा | अत्यधिक बारिश |
ओडिशा में अच्छी बारिश
ओडिशा में अच्छी बारिश की सबसे बड़ी वजह उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, गंगीय पश्चिम बंगाल और उत्तर ओडिशा के आसपास बार-बार बनने वाले मौसमी सिस्टम हैं। इस मानसून के दौरान इस क्षेत्र में कई निम्न दबाव क्षेत्र और डिप्रेशन बने, जो बाद में उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए ओडिशा से गुजरे। इन सिस्टम के प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में व्यापक रूप से मध्यम से भारी बारिश हुई। खासकर उत्तरी और मध्य ओडिशा में इनका असर अधिक देखने को मिला।
लगातार एक के बाद एक मौसम प्रणालियों के गुजरने से ओडिशा में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी ऊपर बना रहा। फिलहाल एक और डिप्रेशन तटीय पश्चिम बंगाल, गंगीय पश्चिम बंगाल के आसपास और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में सक्रिय है। आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में अगले एक सप्ताह तक किसी बड़े मौसम सिस्टम के बनने की संभावना कम है। ऐसे में ओडिशा में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं। अगस्त के आखिरी हिस्से में उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक और निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह सिस्टम विकसित होकर उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ता है, तो ओडिशा में एक बार फिर बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
इस तरह देशभर में मानसून 13% कमजोर रहने के बावजूद ओडिशा को बंगाल की खाड़ी के ऊपर बार-बार बनने वाली मौसम प्रणालियों का फायदा मिला है। अब तक 27% बारिश की अतिरिक्त मात्रा के साथ ओडिशा 2026 के मानसून सीजन में देश के सबसे अधिक बारिश पाने वाले राज्यों में शामिल हो गया है।
महाराष्ट्र में कितनी बारिश
महाराष्ट्र में विदर्भ और मराठवाड़ा में बारिश की कमी घटकर एक अंक में आ गई थी, जबकि पश्चिमी घाट स्थित उत्तर-दक्षिण दिशा वाले मध्य महाराष्ट्र में बारिश सामान्य से 35% से अधिक पहुंच गई थी। लेकिन अगस्त का महीना राज्य के लिए निराशाजनक साबित हुआ है। बारिश कमजोर और छिटपुट रहने से मध्य महाराष्ट्र का सरप्लस लगातार कम हो रहा है और अब यह घटकर महज 16% रह गया है। वहीं, विदर्भ और मराठवाड़ा में बारिश सामान्य की ±19% सीमा से नीचे चली गई है। विदर्भ में अब सामान्य से 22% और मराठवाड़ा में 21% कम बारिश दर्ज की जा रही है। आने वाले दिनों में भी स्थिति में बड़े सुधार की संभावना नहीं है, बल्कि बारिश की कमी और बढ़ सकती है। ब्रह्मपुरी, गोंदिया, गढ़चिरौली, चंद्रपुर, नागपुर, वर्धा, अमरावती और यवतमाल जैसे इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। वहीं पुणे, नासिक, सांगली, सतारा, सोलापुर और कोल्हापुर सहित मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी छिटपुट बारिश हो सकती है। हालांकि, बारिश का विस्तार और तीव्रता सामान्य जरूरतों के मुकाबले काफी कम रहने की संभावना है। महाराष्ट्र में सीमित मौसम गतिविधियों के चलते मध्य महाराष्ट्र में बारिश का अतिरिक्त आंकड़ा आगे और घट सकता है और यह सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में भी पहुंच सकता है।
दिल्ली में अबतक कितनी बारिश?
दिल्ली में अगस्त महीने की औसत बारिश का आंकड़ा पार हो गया है। सफदरजंग वेधशाला में महीने के शुरुआती 21 दिनों में कुल 235.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। अगस्त महीने की सामान्य औसत बारिश 233.1 मिलीमीटर है। आईएमडी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सफदरजंग वेधशाला ने 21 अगस्त तक ही इस औसत आंकड़े को पार कर लिया है। इसका मतलब है कि महीने के अभी कई दिन बाकी हैं और इस दौरान होने वाली बारिश से अगस्त का कुल आंकड़ा और बढ़ सकता है। अब 21 अगस्त तक दर्ज 235.3 मिमी बारिश के साथ दिल्ली ने एक बार फिर अगस्त की सामान्य बारिश का स्तर पार कर लिया है।
