'माननीय' बनने के लिए केजरीवाल के पास हैं अब ये 3 विकल्प, अपनी सीट हारने के बाद विधायिका का नहीं हैं हिस्सा

Arvind Kejriwal : दिल्ली चुनाव में AAP की हार के बाद केजरीवाल दिल्ली या पंजाब में चुनाव लड़ने का खतरा नहीं उठाएंगे। भ्रष्टाचार, घोटालों और अन्य कानूनी मामलों के चलते उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है। दिल्ली और पंजाब दोनों जगहों पर सुरक्षित सीट की गारंटी नहीं है। ऐसे में वह चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे।

Arvind Kejriwal : आम आदमी पार्टी (AAP) अपने गढ़ दिल्ली में चुनाव हार चुकी है। लोगों की AAP सरकार से नाराजगी इतनी ज्यादा थी कि पार्टी के कर्ता-धर्ता और संयोजक अरविंद केजरीवाल भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। उन्हें नई दिल्ली सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी परवेश वर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद केजरीवाल के पास अब कोई संवैधानिक पद नहीं है। आबकारी नीति घोटाला मामले में जमानत मिलने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। चुनाव हारने तक वह विधायक थे लेकिन अब यह भी उनके हाथ से निकल गया। उनके पास अब कोई संवैधानिक पद नहीं है। ऐसे में अगर वह विधायिका का हिस्सा बनना चाहते हैं तो उनके पास अब तीन विकल्प हैं।

Arvind Kejriwal

नई दिल्ली सीट से चुनाव हार गए अरविंद केजरीवाल।

किसी विधायक की छोड़ी हुई सीट पर लड़ना होगा उपचुनाव

पहला तो यह कि केजरीवाल यदि विधायक बनना चाहते हैं तो उन्हें दिल्ली में या पंजाब में अपने किसी विधायक से उनके लिए अपनी सीट छोड़ने के लिए कहना होगा। यदि कोई विधायक उनके लिए अपनी सीट छोड़ता है तो इस सीट पर उपचुनाव होगा और कजरीवाल को यह सीट जीतकर विधानसभा पहुंचना होगा। दूसरा रास्ता, राज्यसभा का है। राज्यसभा में AAP के कई सांसद हैं, केजरीवाल यदि राज्यसभा जाना चाहते हैं तो उन्हें हरभजन सिंह, राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल जैसे सदस्यों से सीट छोड़ने के लिए कहना होगा। मालीवाल तो ऐसा नहीं करेंगी लेकिन चड्ढा या हरभजन सिंह की निष्ठा की जांच केजरीवाल को करनी चाहिए। तीसरा रास्ता लोकसभा का है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब से AAP तीन सांसद चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। कोई सांसद अपनी सीट यदि छोड़ता है तो यहां भी उप चुनाव होगा। उप चुनाव में केजरीवाल को जीत दर्ज करनी होगी।

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