- नहीं रहे अभिनेता नाना पाटेकर
- 1994 में नाना ने जीता था फिल्मफेयर अवॉर्ड
- क्रांतिवीर के लिए बने थे बेस्ट एक्टर
भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार नाना पाटेकर के बारे में अक्सर लोग ये बोलते हैं कि वो बहुत ही गुस्से वाले थे। उनकी बेबाकी उनकी पहचान थी लेकिन उनके गुस्से से हर कोई डरता था। शायद ये लोग नाना पाटेकर को बहुत ऊपर-ऊपर से जानते थे क्योंकि नाना पाटेकर को करीब से जानने वाले लोग ये मानते हैं कि उन्होंने उनसे मासूम इंसान ही नहीं देखा। उनकी मासूमियत से फैंस साल 1994 में रू-ब-रू भी हुए थे जब वो फिल्मफेयर के स्टेज पर बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड लेने के लिए पहुंचे थे। जब वो अवॉर्ड ले रहे थे तब उन्होंने कुछ ऐसा कहा कि हर कोई दंग रह गया और सभी ने एक स्वर में बोला "ये कितना भोला इंसान है।" TimesNow NavBharat पर ये खबर भी पढ़ें: अपनी चिता के लिए नाना पाटेकर ने पहले से ही जुटा रखी थी 12 मन लकड़ियां, कहते थे- मुझे मौत पर भरोसा है
Nana Patekar को क्रांतिवीर के लिए मिला था बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड
नाना पाटेकर के करियर में क्रांतिवीर एक अहम फिल्म मानी जाती है। इसमें उन्होंने एक देशभक्त का किरदार निभाया था और लोगों को समझाया था कि धर्म के नाम पर लड़ना समझदारी नहीं है। ये फिल्म दर्शकों को काफी पसंद आई थी क्योंकि इसमें नाना ने कमाल की परफॉर्मेंस दी थी। फिल्म क्रांतिवीर के लिए ही नाना पाटेकर को साल 1994 में बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। उन्हें ये अवॉर्ड खुद लीजेंड दिलीप कुमार ने दिया था। TimesNow NavBharat पर ये खबर भी पढ़ें: Nana Patekar Upcoming Movies: मौत के बाद इन 3 फिल्मों में दिखेंगे नाना पाटेकर, देखें लिस्ट
जब नाना पाटेकर स्टेज पर अवॉर्ड लेने के लिए पहुंचे तो उनका चेहरा बता रहा था कि वो भरोसा नहीं कर पा रहे हैं कि वो विनर हैं। नाना ने ये बात स्टेज पर भी मानी कि वो भरोसा ही नहीं कर पा रहे हैं। नाना ने दिलीप कुमार जैसे लीजेंड के सामने खड़े होकर कहा, "सभी मेरे हैं, मैं हिन्दी में बोलता हूं सब समझ जाएंगे। मैं यहां कोई मैसेज नहीं देना चाहता हूं, जो मैसेज देना था मेहुल ने फिल्म में दे दिया है। मैं मेहुल का आभारी हूं। मैं एक्टर तो दिखता नहीं हूं... हमाल की शक्ल पाने के बाद भी मुझे ये मिला है। मैं आपमें से ही एक हूं। मुझे लगता था कि फिल्मफेयर अवॉर्ड बिकता है लेकिन मुझे मिलने के बाद मेरा विचार बदल गया है। अगर मुझे अवॉर्ड नहीं मिलता तो मैं शायद कहता कि ये अवॉर्ड बिकता है क्या करूं... इंसान ही हूं ना। मेरे साथ जो लोग भी नॉमिनेट थे, अगर ये अवॉर्ड उनमें से भी किसी को मिलता तो भी मैं इतना ही खुश होता। कुछ दिनों पहले मुझे पैनासोनिक का अवॉर्ड मिला, जहां अनिल ने मुझसे कहा कि अवॉर्ड तुम्हें मिलेगा मैं बस ताली बजाने आया हूं। मुझे लगता है कि एक्टर्स में ऐसी ही दोस्ती रहनी चाहिए। मैं सभी का धन्यवाद करता हूं।"
नाना पाटेकर के मुंह से ये बातें सुनकर वहां बैठी ऑडियंस तो हंसने ही लगी थी, उसके साथ-साथ स्टेज पर खड़े दिलीप कुमार भी मुस्कुरा दिए। दिलीप कुमार उस दौर में नए कलाकारों का यूं ही हौंसला बढ़ाते थे। स्टेज पर जिस तरह से उन्होंने दिलीप को आशीर्वाद दिया, उसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
नाना पाटेकर ने करियर में 4 फिल्मफेयर के अवॉर्ड जीते थे। फिल्म परिंदा के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग रोल, अंगार और अपहरण के लिए उन्हें बेस्ट विलेन और क्रांतिवीर के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड से नवाजा गया था। नाना ने अपने सालों लम्बे करियर में 3 बार नेशनल अवॉर्ड भी जीते थे। परिंदा और अग्निसाक्षी के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और क्रांतिवीर के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।