बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार (Akshay Kumar) से जुड़े एक मामले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ता गणेश चुक्कल को बड़ी राहत मिली है। धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों में गिरफ्तार किए गए गणेश को मुंबई की अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया है। इस मामले में उनके साथी समीर सावंत की गिरफ्तारी की भी खबर है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने गणेश चुक्कल को एक लाख रुपये की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। (Times Now Navbharat पर ये भी पढ़ें-'अगर हमारे साथ ऐसा हुआ तो…' Imran Khan की गर्लफ्रेंड लेखा वॉशिंगटन ने सुनाई आपबीती)
अक्षय कुमार से जुड़े मामले में MNS कार्यकर्ता को मिली रिहाई (pic credit-instagram)
क्या है मामला?
बता दें कि ये मामला अक्षय कुमार की बहन अलका भाटिया हिरानंदानी से जुड़े एक फ्लैट का है। यह फ्लैट हिरानंदानी एस्टेट्स में है और मेलरोनिया हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से जुड़ा है। अलका इस कंपनी की निदेशकों में से एक हैं। इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, गणेश चुक्कल को गिरफ्तार करने के 24 घंटे के भीतर अदालत में पेश करना जरूरी था। पहले उन्हें 5 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में रखा गया था। बाद में उनकी हिरासत 9 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई। 5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि यह मामला पवई पुलिस थाने से क्राइम ब्रांच की डीसीबी सीआईडी यूनिट 10 को सौंप दिया गया है। खबर के मुताबिक, गणेश चुक्कल को 6 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था, लेकिन अगले तीन दिनों तक अदालत में पेश नहीं किया गया। 7 अक्टूबर को डीसीबी सीआईडी ने अंधेरी कोर्ट को बताया कि चुक्कल को 9 अक्टूबर को एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया जाएगा।
गणेश चुक्कल की ओर से वकील राजेंद्र शिरोडकर, अर्चित साखलकर, लक्ष्मण शाहापुर और निहार घाग ने दलील दी कि जांच एजेंसी को मामला अपने हाथ में लेने के बाद आरोपी को अदालत में पेश करना जरूरी था। बचाव पक्ष ने कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने और अवैध हिरासत का हवाला देते हुए उनकी रिहाई की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी ने 12 अक्टूबर को अदालत में हलफनामा दाखिल किया। हालांकि, अदालत को बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करने के लिए उसमें कोई ठोस आधार नहीं मिला। इसके बाद अदालत ने गणेश चुक्कल को रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि क्राइम ब्रांच की हिरासत में लेने के 24 घंटे के भीतर उन्हें एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया जाना चाहिए था।
