Devanand Birthday: बॉलीवुड के सदाबहार एक्टर के बारे में जब भी बात की जाएगी, देवानंद का नाम सबसे पहले लिया जाएगा। 50 और 60 के दशक में बॉलीवुड के सबसे हैंडसम एक्टर देवानंद की 26 सितंबर को 99वीं बर्थ एनिवर्सरी है। देवानंद का असली नाम धर्म देव पिशोरीलाल आनंद था। उनका जन्म साल 1923 में ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के शकरगढ़ में हुआ था, जो अभी पाकिस्तान में हैं। देवानंद के पिता पिशोरीलाल आनंद गुरदासपुर जिला कोर्ट में जाने-माने एडवोकेट थे। देवानंद ने अपनी पढ़ाई लाहौर के नेशनल कॉलेज में की थी। देवानंद ने साल 1945 में फिल्म हम एक है से अपने करियर की शुरुआत की थी।
Devanand
देवानंद 40 के दशक में बंबई आ गए थे। देवानंद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह जेब में 30 रुपए लेकर लाहौर से फ्रंटीयर मेल पर बंबई आए थे। बंबई आने के बाद उन्होंने मिलिट्री सेंसर ऑफिस पर 65 रुपए सैलेरी में नौकरी की थी। साल 1947 में भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो गया था। इस दौरान देवानंद फिल्मों में किस्मत आजमा रहे थे। देवानंद ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'बंटवारे के वक्त मेरे पिता गुरदासपुर में थे और मैं बंबई में था।' देवानंद साल 1998 में तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लाहौर बस यात्रा का हिस्सा बने थे। इस दौरान लगभग 56 साल बाद वह लाहौर स्थित अपने कॉलेज भी गए थे।
जब पंडित नेहरू से मिलने गए देवानंद, राज कपूर और दिलीप कुमार
50 के दशक में देवानंद, राज कपूर और दिलीप कुमार की तिकड़ी ने फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया था। इस तिकड़ी के कायल तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू भी थे। पंडित नेहरू ने तीनों को अपने आवास पर भी बुलाया था। देवानंद ने अपनी ऑटोबायोग्राफी रोमांसिंग विद लाइफ में लिखा, 'उस वक्त पंडित नेहरू बीमार थे। जब हम वहां पर पहुंचे तो पंडित नेहरू ने हम तीनों को गले से लगा लिया था। राज कपूर ने उनसे सवाल पूछा, 'पंडितजी हमने सुना है आप जहां भी जाते थे औरतें आपके पीछे भागा करती थीं।' पंडित नेहरू ने कहा, 'मैं इतना पॉपुलर नहीं हूं, जितने तुम हो।'
देवानंद ने पूछा लेडी माउंटबेटन से जुड़ा सवाल
देवानंद ने अपनी किताब में लिखा ' मैंने पंडितजी से पूछ ही लिया, 'आपकी मुस्कान ने लेडी माउंटबेटन का दिल जीत लिया था। क्या यह सच है?' उनका चेहरा लाल हो गया और हंसते हुए कहा, 'मुझे अपने बारे में ऐसी कहानियां सुनकर मजा आता है।'
देवानंद के मुताबिक, 'दिलीप कुमार ने पंडित नेहरू से कहा, 'लेडी माउंटबेटन ने ये खुद माना है कि आप उनकी कमजोरी थे।' इस पर नेहरूजी ने हंसते हुए कहा कि, 'लोग ये चाहते हैं कि मैं ऐसी कहानियों पर विश्वास कर लूं।'
