Who Will Be Rajasthan CM: राजस्थान में जबरदस्त जीत हासिल करने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी अब तक मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान नहीं कर पाई है। इसे लेकर लगातार मंथन का दौर जारी है तमाम फॉर्मूलों पर विचार हो रहा है। इस बीच वसुंधरा राजे ने अपने तेवरों से जता दिया है कि वह एक बार फिर सीएम पद संभालना चाहती हैं। इसे लेकर उनकी ओर से लगातार लामबंदी भी जारी है। अपने आवास पर उन्होंने कई विधायकों संग बैठक की, साथ ही आलाकमान से मिलने दिल्ली भी पहुंचीं।
कौन बनेगा राजस्थान का सीएम?
भाजपा अपना सकती है ये फॉर्मूला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजनीतिक समीकरणों को संतुलित करने भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में एक सीएम और दो डिप्टी के फॉर्मूले पर विचार कर रही है। इस रणनीति का उद्देश्य प्रमुख समुदायों राजपूत, ब्राह्मण, मीना और जाट के बीच शीर्ष तीन पदों को बांटकर इन समुदायों को साधना है। साथ ही स्पीकर पद के लिए किसी अनुसूचित जाति की महिला विधायक को मौका दिया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में सीएम पद के नाम का ऐलान
भाजपा ने जहां छत्तीसगढ़ में सीएम पद के नाम का ऐलान कर दिया है, मध्य प्रदेश में आज विधायकों की बैठक हो रही है, लेकिन राजस्थान को लेकर मामला अटका हुआ है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और बाबा बालकनाथ जैसे नेताओं ने राजस्थान में शीर्ष पद के लिए अपनी दिलचस्पी जता दी है। गजेंद्र सिंह शेखावत, अश्विनी वैष्णव, अर्जुन मेघवाल, सीपी जोशी, राज्यवर्धन सिंह, दीया कुमारी, किरोड़ी लाल मीना जैसे नाम भी चर्चा में हैं। राजस्थान के लिए पार्टी पर्यवेक्षक केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यसभा सांसद सरोज पांडे और वरिष्ठ भाजपा नेता विनोद तावड़े 12 दिसंबर को जयपुर में एक अहम बैठक करेंगे।
भाजपा ने जीतीं 115 सीटें
भारतीय जनता पार्टी ने 199 सीटों वाली विधानसभा में 115 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस केवल 69 सीटों पर सिमट गई। जब पार्टी ने आखिरी बार राजस्थान में सरकार बनाई थी तब वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री थीं। इस महीने की शुरुआत में पार्टी की जीत के बाद बाबा बालक नाथ का नाम सामने आया था। वहीं, वसुंधरा राजे शुरू से ही अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रही हैं। रविवार को राज्य के कई नए और पूर्व विधायक जयपुर में वसुंधरा राजे के घर पहुंचे।
गहलोत का भाजपा पर निशाना
राजस्थान के निवर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि पार्टी के भीतर अनुशासन की कमी के कारण तीन राज्यों में सीएम की घोषणा में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि इस पार्टी में कोई अनुशासन नहीं है। अगर हमने भी ऐसा किया होता, तो मुझे नहीं पता कि उन्होंने हमारे खिलाफ क्या आरोप लगाए होते और लोगों को गुमराह किया गया होता। उन्होंने चुनावों का ध्रुवीकरण किया, हम नई सरकार के साथ सहयोग करेंगे। वहीं, भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने गहलोत के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस को 2018 में अपने मुख्यमंत्री की घोषणा करने में एक पखवाड़े से अधिक समय लग गया था।
