बंगाल में चुनावी चटखारा: किसमें कितना दम, मोदी की झालमुड़ी या दीदी की टोकरी?

पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी और टीएमसी ने पूरी ताकत झोंक दी है,जहां मोदी की 'झालमुड़ी' और ममता की 'टोकरी'चुनावी प्रतीक बन गए हैं। अब 29 अप्रैल की वोटिंग और 4 मई के नतीजे तय करेंगे कि बंगाल में बदलाव होगा या दीदी का दबदबा कायम रहेगा।

पश्चिम बंगाल में चुनावी संग्राम अपने चरम पर है। 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होना है और 4 मई को नतीजे सामने आएंगे। ऐसे में सवाल यही है कि क्या बंगाल में दिल्ली का दावा भारी पड़ेगा या दीदी का दबदबा बरकरार रहेगा? इस बार बंगाल का चुनाव सिर्फ मुद्दों पर नहीं, बल्कि मिजाज, प्रतीकों और सियासी चटखारों पर भी लड़ा गया। एक तरफ बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , गृहमंत्री अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, हिमंत बिस्वा सरमा समेत पूरी ताकत झोंक दी, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने भी आक्रामक अभियान चलाया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव। (फोटो-AI)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव। (फोटो-AI)

रैलियों और रोड शो की भरमार

15 मार्च से शुरू हुए चुनावी अभियान में बीजेपी और टीएमसी दोनों ने पूरी ताकत झोंक दी। प्रधानमंत्री मोदी ने 21 रैलियां और 3 रोड शो किए, साथ ही हुगली नदी में नौकायन कर चुनावी संदेश दिया। अमित शाह ने 20 जनसभाएं और 11 रोड शो किए। बात अगर सत्ताधारी पार्टी की करें तो टीएमसी की तरफ से ममता बनर्जी ने 30 से अधिक रैलियां और रोड शो किए, जबकि अभिषेक बनर्जी ने 50 से ज्यादा सभाएं और पदयात्राएं कर चुनावी मैदान को गर्म बनाए रखा।

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