BJP on Tejashwi Yadav: बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची से उनका नाम गायब है। इस दावे को पटना जिला प्रशासन ने सिरे से नकारते हुए कहा कि तेजस्वी का नाम मतदाता सूची में है। मतदाता सूची का प्रारूप जारी किया है, जिसमें उनका नाम है। चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव से सवाल किया कि वोटर लिस्ट में नाम होने के बावजूद वह भ्रम क्यों फैला रहे हैं।
तेजस्वी यादव के दावे पर बीजेपी का पलटवार (ANI)
EC ने तेजस्वी के सवालों का दिया जवाब
- त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतंत्र का आधार है।
- SIR में क्लेम और ऑब्जेक्शन पीरियड 1 अगस्त से 1 सितम्बर तक है।
- तेजस्वी यादव को राजद के 47,506 बूथ लेवल एजेंट से क्लेम एंड ऑब्जेक्शन फाइल करने के लिए कहना चाहिए। अगर उन्हें लगता है कि योग्य मतदाता छूट गया है या कोई गलत नाम जुड़ गया है।
- पिछले 24 घंटे में राजद समेत किसी भी पार्टी ने कोई क्लेम नहीं दिया है।
- सभी BLA ने इस बात पर सहमति जताई है कि वो पूरी ड्राफ्ट लिस्ट को बूथ दर बूथ जांचेंगे।
- चुनाव आयोग ने तेजस्वी से पूछा है कि नाम होने के बावजूद वो भ्रम क्यों फैला हैं।
भाजपा ने भी तेजस्वी यादव पर पलटवार किया। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय एक्स पर पोस्ट करके कहा कि तेजस्वी का दावा पूरी तरह गलत है। अमित मालवीय ने कहा, तेजस्वी का यह दावा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के बाद उनका नाम मतदाता सूची से गायब है, झूठा है। उनका नाम क्रमांक 416 पर है। गलत सूचना को बढ़ावा देने से पहले कृपया तथ्यों की पुष्टि कर लें। मतदाताओं को गुमराह करने के जानबूझकर किए जा रहे प्रयासों का पर्दाफ़ाश किया जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी विवाद के बीच आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से कट गया है। तेजस्वी ने मीडिया के सामने नंबर डालकर चेक किया और दावा किया कि उनका नाम नहीं दिख रहा है। तेजस्वी ने कहा नाम वोटर लिस्ट से कट गया है, अब मैं कैसे चुनाव लडूंगा, मैंने गणना प्रपत्र भरा था। जो प्रक्रिया है उसके तहत चेक करने पर मेरा नाम नहीं आ रहा है।
तेजस्वी ने मीडिया के सामने एपिक नंबर डालकर चेक किया। तेजस्वी ने कहा कि हमारे सवाल से EC बच क्यों रहा है? ट्रांसपेरेंसी क्यों नहीं रख रहे हैं? EC बूथ वाइज लिस्ट पॉलिटिकल पार्टियों को दे। आपत्ति दर्ज करने की समय सीमा बढ़ाया जाए, इसके लिए सिर्फ सात दिनों का वक्त दिया गया है।
