Rajasthan Kirodi Lal Meena Sawai Madhopur Election 2023 Profile: पुरानी परंपरा के अनुसार राजस्थान में हर पांच साल में सत्ता बदल जाती है। इस हिसाब से इस बार बीजेपी को मौका मिल सकता है। इसलिए बीजेपी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर रणनीति की अजमाईश कर रही है। इसलिए बीजेपी ने राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा को विधानसभा चुनाव समर में उतारा है। उन्हें सावई माधोपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान के मीणा समुदाय से आते हैं। वे इस समुदाय के कद्दावर नेता हैं। किरोड़ी लाल मीणा जल जीवन मिशन, खान घोटाला, आईटी घोटाला, पेपर लीक मामलों को लेकर अशोक गहलोत सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं।
सवाई माधोपुर से चुनाव मैदान में बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीण
किरोड़ी लाल मीणा का राजनीतिक करियर
किरोड़ी लाल मीणा वर्तमान में राजस्थान कोटे से बीजेपी के राज्यसभा सांसद हैं। किरोड़ी लाल मीणा 1980 के दशक में सक्रिय राजनीति में आए। वे डॉक्टरी छोड़कर राजनीति में आए थे। वे आरएसएस से जुड़े और फिर बीजेपी आए। लेकिन वसुंधरा राजे से मतभेद होने के बाद वे बीजेपी से अलग हो गए। इसके बाद वो पीए संगमा की पार्टी नेशनल्स पीपुल्स पार्टी में शामिल हो गए। 2013 के राजस्थान चुनाव में उन्होंने 150 उम्मीदवार खड़े किये थे। मगर उनमें से सिर्फ 4 ही जीत पाए। इस चुनाव में जीतकर वे विधायक बने। समय के साथ बीजेपी के साथ उनके संबंध मधुर होने लगे। 10 वर्ष बाद 2018 में फिर उनकी बीजेपी में वापसी हुई। बीजेपी में आते ही उन्हें पार्टी ने राज्यसभा सांसद बना दिया।
किरोड़ी लाल मीणा की पत्नी गोलमा देवी भी सक्रिय राजनीति में
किरोड़ी लाल मीणा की पत्नी गोलमा देवी भी सक्रिय राजनीति में हैं। वह दो बार विधायक भी चुनी गई। अशोक गहलोत सरकार में मंत्री भी बन चुकी हैं। लेकिन विचारधारा को लेकर उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। साल 2008 में गोलमा देवी दौसा जिले के महुआ सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और फिर मंत्री बनी। किरोड़ी लाल मीणा हिन्दू हैं और मीणा जाति से आते हैं।
किरोड़ी लाल मीणा का व्यक्तिगत परिचय
किरोड़ी लाल मीणा का जन्म 3 नवंबर 1951 को राजस्थान के दौसा जिले के एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम मनोहर लाल मीणा और मां का नाम फूला देवी था। उनके पिता पेशे से एक किसान थे। उनकी पत्नी का नाम गोलमा देवी है। जो राजनीति में एक्टिव हैं। किरोड़ी लाल मीणा की प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में ही हुई। उसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए बीकानेर चले गए। उन्होंने 1977 में राजस्थान में ही सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज बीकानेर से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। वह दो वर्ष तक मेडिकल प्रैक्टिस भी कर चुके है। बाद में वह डॉक्टरी छोड़कर एक्टिव पॉलिटिक्स करने लगे।
