Rajasthan Assembly Election 2023 : राजस्थान में 'लाल डायरी' पर सियासत फिर गरमा गई है। पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने मंगलवार को इस कथित 'लाल डायरी' के 4 पन्ने सार्वजनिक किए। इन पन्नों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के हवाले से लिखा हुआ है कि 'पापा इसलिए वापस सरकार नहीं बना पाते हर बार, इस बार भी में लिखकर दे सकता हूं सरकार बुरी तरह हारेगी।' डायरी में यह भी लिखा है कि 'सरकार के हारने का कारण वे (सीएम गहलोत)' स्वयं हैं। अब इस बारे में सीएम गहलोत ने बुधवार को प्रतिक्रिया दी और पीएम मोदी एवं गृह मंत्री पर सवाल खड़े किए।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023।
गृह मंत्रालय में रची गई साजिश-गहलोत
मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा, 'मुझे लगता है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय में 'लाल डायरी' के बारे में साजिश रची गई। इसमें हमारे एक मंत्री को मिलाया गया। जब मणिपुर जल रहा था तो पूरा देश इस बारे में चिंतित था लेकिन पीएम मोदी और अमित शाह ने वहां के हालात को गंभीरता से नहीं लिया। संसद जब बार-बार स्थगित हो रही थी तो मंत्री से कहलवाया गया राजस्थान में हालात मणिपुर से भी खराब हैं। यह सब मणिपुर हिंसा से ध्यान हटाने के लिए किया गया।'
राज्य में इस बार भी 199 सीटों पर होगा चुनाव
राजस्थान में इस बार भी विधानसभा की सभी 200 सीटों पर चुनाव नहीं होगा। श्रीगंगानगर के करणपुर विधानसभा सीट के कांग्रेस प्रत्याशी गुरमीत सिंह कुनर का निधन हो जाने के बाद अब 199 सीटों पर ही चुनाव होगा। करणपुर सीट से कांग्रेस ने कुन्नर को फिर से उम्मीदवार बनाया था। जयपुर के एम्स में उनका इलाज चल रहा था। वह 75 साल के थे।
कांग्रेस विधायक एवं प्रत्याशी कुन्नेर का निधन
कुन्नेर के बेटे ने बताया कि उनके पिता का पार्थिव शरीर उनके पैतृक स्थान श्री गंगानगर ले जाया गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वरिष्ठ नेता कुन्नेर के निधन पर शोक जताया है। कुन्नेर करणपुर सीट से विधायक थे। 2018 के विधानसभा चुनाव में वह इस सीट पर विजयी हुए। इस सीट से उन्होंने 1998 एवं 2008 के चुनाव में भी जीत दर्ज की थी।
2013 में बसपा उम्मीदवार का हुआ निधन
गौरतलब है कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में अलवर जिले के रामगढ़ सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह का दिल का दौरा पड़ने पर निधन हो गया था। इस कारण पिछली बार चुनाव राजस्थान में 199 सीटों पर ही हुआ था। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने यहां से साफिया खान और भाजपा ने सुखवंत सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था। चुनाव में साफिया खान जीती थीं। 2013 के विधानसभा चुनाव की वोटिंग से पहले चूरू से बसपा उम्मीदवार का निधन हो गया था।
