Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की सियासत में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को जेडीयू (JDU) में सेंध लगाते हुए उसके कई बड़े नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। इसे चुनाव से पहले विपक्षी खेमे को मजबूत करने की दिशा में तेजस्वी का रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
राजद नेता तेजस्वी यादव (फोटो- @yadavtejashwi)
कौन-कौन से नेता हुआ आरजेडी में शामिल
तेजस्वी यादव की मौजूदगी में पूर्णिया के पूर्व जेडीयू सांसद संतोष कुशवाहा, जहानाबाद के पूर्व सांसद जगदीश शर्मा के पुत्र व जेडीयू के पूर्व विधायक राहुल शर्मा, बांका के जेडीयू सांसद गिरधारी यादव के पुत्र चाणक्य प्रकाश और वैशाली के वरिष्ठ नेता अजय कुशवाहा ने राजद की सदस्यता ग्रहण की।
तेजस्वी का राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव का यह कदम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के लिए बड़ा झटका है। हाल के महीनों में जेडीयू के कई नेता संगठनात्मक निष्क्रियता और नेतृत्व की दिशा को लेकर असंतोष जता रहे थे। तेजस्वी ने इसी असंतोष का लाभ उठाते हुए उन नेताओं को अपने खेमे में शामिल कर लिया। तेजस्वी यादव ने शामिल होने वाले नेताओं का स्वागत करते हुए कहा- “आरजेडी परिवार में आपका स्वागत है। बिहार के विकास और सामाजिक न्याय की लड़ाई में अब हम सब एकजुट हैं। यह सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि विचारधारा का संगम है।”
क्षेत्रीय समीकरणों पर असर
पूर्णिया, जहानाबाद, बांका और वैशाली — ये चारों जिले अपने-अपने क्षेत्र में राजनीतिक रूप से अहम माने जाते हैं। पूर्णिया में संतोष कुशवाहा का कुर्मी और पिछड़ा वोट बैंक पर प्रभाव है। जहानाबाद के राहुल शर्मा स्थानीय यादव और सवर्ण वर्ग में पकड़ रखते हैं। बांका में गिरधारी यादव का परिवार लंबे समय से सक्रिय राजनीति में है। वैशाली में अजय कुशवाहा की संगठनात्मक पकड़ मजबूत मानी जाती है। इन नेताओं के आरजेडी में आने से तेजस्वी यादव को न सिर्फ संगठनात्मक बल मिलेगा, बल्कि पूर्वी और दक्षिण बिहार में सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ेगा।
जेडीयू में हलचल तेज
इन नामों के शामिल होने के बाद जेडीयू के अंदर बेचैनी बढ़ गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई अन्य नेता भी आगामी चुनाव से पहले अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। जेडीयू के वरिष्ठ नेता इस घटनाक्रम को “व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा” का परिणाम बता रहे हैं, जबकि आरजेडी इसे “तेजस्वी के नेतृत्व पर भरोसे की जीत” बता रही है।
