Hajipur Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 में बिहार की हाजीपुर सीट खास चर्चा में है। वजह हैं चिराग पासवान जो इस बार यहां से मैदान में उतरे हैं। इस सीट पर लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के तहत वोटिंग हुई थी। हाजीपुर में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान का मुकाबला राजद प्रत्याशी और पूर्व मंत्री शिव चंद्र राम से है। चिराग के दिवंगत पिता राम विलास पासवान ने आठ बार हाजीपुर सीट जीती थी। अब उनके बेटे चिराग यहां से भाग्य आजमा रहे हैं।
हाजीपुर में चिराग पासवान की अग्निपरीक्षा
1977 में रामविलास की जीत का सिलसिला शुरू
बिहार की हाजीपुर लोकसभा सीट हमेशा से ही एक प्रतिष्ठित सीट रही है। 1977 में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान ने इस सीट पर जीत हासिल करके कांग्रेस को झटका दिया था। इस जीत ने उनके राजनीतिक करियर को ऊंचाई पर पहुंचाया और वह बिहार की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। आज परिवार के बीच ही मुकाबला है। मौजूदा सांसद पशुपति पारस अब एनडीए में नहीं है, जबकि उनके भतीजे चिराग पासवान इस सीट पर कब्जा करने उतरे हैं। जब से चिराग पासवान ने हाजीपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, तभी से सियासी गलियारों में हलचल मची थी।
हाजीपुर का चेहरा थे रामविलास
2024 के लोकसभा चुनाव का नतीजा 4 जून को सामने आएगा। हाजीपुर सीट के नतीजे का हर किसी को इंतजार है। नतीजा जो भी रहे, यह बिहार की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाएगा। दिवंगत रामविलास पासवान हाजीपुर का चेहरा थे। उन्होंने 1977 में हाजीपुर से चुनाव जीतकर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। वह लगातार चार बार इस सीट पर जीते। 1989 में उन्होंने कांग्रेस के महावीर पासवान को 5 लाख 4 हजार वोटों से हराकर रिकॉर्ड कायम किया।
चिराग पासवान के सामने बड़ी चुनौती
हालांकि, जीत का सिलसिला 2009 में टूटा जब रामविलास पासवान जदयू के रामसुंदर दास से हार गए थे। हालांकि, बाद में उन्होंने दोबारा इस सीट पर कब्जा जमाया। 2014 में जीत दर्ज करके वह आठवीं बार सांसद चुने गए। 2019 में खराब सेहत के चलते अपने भाई पशुपति पारस को चुनावी मैदान में उतारा। पशुपति पारस ने आरजेडी के शिव चंद्रराम को हराकर हाजीपुर सीट पर जीत का परचम लहराया। 2024 लोकसभा चुनाव में उनके बेटे चिराग पासवान मैदान में हैं। पिता की साख दांव पर है और चिराग के सामने उनकी विरासत को बरकरार रखने की चुनौती है।
