Gorakhpur Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। कल सातवें और आखिरी चरण में मतदान हैं। हालांकि, सभी की नरजें सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर पर रहने वाली हैं। इस चर्चित सीट पर इस बार भोजपुरी के दो दिग्गज कलाकारों के बीच सियासी लड़ाई है। टीवी धारावाहिक लापतागंज से मशहूर हुईं इंडिया गठबंधन की उम्मीदवार काजल निषाद और लोकसभा क्षेत्र से सांसद एवं भाजपा उम्मीदवार रवि किशन की मौजूदगी ने चुनाव प्रचार अभियान को रोमांचक बना दिया है। काजल निषाद और रवि किशन समेत यहां कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। हालांकि, कड़ा मुकाबला काजल निषाद और रवि किशन के बीच ही माना जा रहा है।
गोरखुपर लोकसभा चुनाव
लोकसभा चुनाव के अंतिम एवं सातवें चरण में एक जून को होने वाले मतदान की उलटी गिनती शुरू होने के साथ ही गोरखपुर में सत्ता पक्ष तथा विपक्ष ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वे जातीय समीकरण सहित हर पहलू पर ध्यान दे रहे हैं। रवि किशन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेकर मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं काजल निषाद मंचों से रवि किशन को फिल्मी शैली में ही ललकारती नजर आती हैं।
पांच बार लगातार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर लोकसभा सीट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1998 से 2014 तक लगातार पांच बार सांसद रहे। 2017 में उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रवीण निषाद को उतारकर यहां कब्जा जमा लिया। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रवि किशन को चुनाव में प्रत्याशी बनाकर अपनी प्रतिष्ठा वाली सीट को पुन: जीत लिया था। यहां दो उप-चुनावों 1970 और 2018 समेत कुल 19 बार हुए लोकसभा चुनाव में गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों ने 10 बार चुनाव जीता जिसमें पांच बार योगी आदित्यनाथ, चार बार उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ और एक बार उनके पितामह गुरु महंत दिग्विजय नाथ ने चुनाव जीता।
जातीय समीकरण पर जोर
गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में कुल 20,97,202 मतदाता हैं जिनमें 11,23,868 पुरुष, 9,73,160 महिला और तृतीय लिंग के 174 मतदाता हैं। गोरखपुर में पिछले कई आम चुनावों से विपक्षी दलों ने निषाद समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों को ही उम्मीदवार के रूप में आगे किया है। 2018 के उपचुनाव में निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद सपा के चिह्न पर यहां से चुनाव जीत गए थे, लेकिन बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए। इस लोकसभा क्षेत्र में करीब चार लाख निषाद मतदाता हैं और निषादों का वोट हासिल करने के लिए भाजपा ने अपने सहयोगी दल ‘निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल’ (निषाद) के अध्यक्ष एवं उप्र सरकार के मंत्री संजय निषाद को आगे करके अपने पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश की है।
