Rosera Assembly Election 2025: बिहार की रोसड़ा विधानसभा सीट, जो समस्तीपुर जिले में स्थित है, एक सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। यह सीट एससी-आरक्षित है और इसकी वोटिंग फेज 1 के तहत 6 नवंबर को होगी, जबकि मतगणना 14 नवंबर को संपन्न होगी। रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र केवल चुनावी परिणामों के कारण ही नहीं, बल्कि अपने ऐतिहासिक राजनीतिक परिवेश और बदलते सामाजिक समीकरणों के कारण भी जाना जाता है। पिछले कई दशकों तक यह क्षेत्र वामपंथी विचारधारा, विशेषकर सीपीएम, का गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन पिछले दस वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यहां अपनी पकड़ मजबूत करना शुरू किया।
रोसड़ा विधानसभा चुनाव 2025
2020 के विधानसभा चुनाव का हाल
2020 के विधानसभा चुनाव में यह परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जब भाजपा के उम्मीदवार वीरेंद्र पासवान ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बीजेपी के वीरेंद्र पासवान ने इंडियन नेशनल कांग्रेस के नागेंद्र कुमार पासवान विकल को 35,744 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस जीत ने भाजपा की मजबूत स्थिति और रोसड़ा में उनके व्यापक समर्थन को उजागर किया। वीरेंद्र पासवान ने कुल 47.93 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस महागठबंधन का हिस्सा होते हुए केवल 28.27 प्रतिशत वोटों पर सिमट गई। वहीं, एलजेपी के कृष्ण राज ने 22,995 वोट (12.64 प्रतिशत) हासिल कर मुकाबले को और चुनौतीपूर्ण बनाया।
क्या है रोसड़ा विधानसभा सीट का इतिहास?
रोसड़ा विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास काफी रोचक और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1977 से अब तक इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने प्रत्येक ने चार-चार बार जीत हासिल की है, जो यहां की जनता के वैचारिक विभाजन को दर्शाता है। यह आंकड़ा बताता है कि रोसड़ा पहले वामपंथ की प्रभावशाली शक्ति का केंद्र रहा, लेकिन अब दक्षिणपंथी विचारधारा का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के वीरेंद्र पासवान ने यहां जीत दर्ज की थी। उससे पहले, 2015 में कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार ने इस सीट को अपने नाम किया था। 2010 में भाजपा की मंजू हजारी ने यहां जीत हासिल की थी।
इस सीट के 2015 के चुनावी परिणाम
यदि 2015 के चुनाव परिणामों पर ध्यान दें, तो डॉ. अशोक कुमार ने 85,506 वोट प्राप्त कर 34,361 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। यह परिणाम 2020 के चुनाव के बिल्कुल विपरीत था और इससे स्पष्ट होता है कि रोसड़ा के मतदाता किसी एक पार्टी के प्रति हमेशा वफादार नहीं रहते। उनकी प्राथमिकता गठबंधन की स्थिति और उम्मीदवार की स्थानीय छवि पर निर्भर करती है। 2010 में भाजपा की मंजू हजारी ने 12,119 वोटों के बेहद करीब अंतर से जीत दर्ज की थी, जो इस क्षेत्र में भाजपा के उभरते प्रभाव का शुरुआती संकेत माना जा सकता है।
रोसड़ा विधानसभा का जातीय समीकरण
रोसड़ा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, यानी यहां के चुनावों में मुख्य रूप से दलित समुदायों की भागीदारी निर्णायक होती है, जिसमें पासवान और रविदास समुदाय की अहम भूमिका रहती है। 2020 के चुनाव में दोनों मुख्य उम्मीदवार पासवान समुदाय से थे, जो इस समुदाय की राजनीतिक ताकत को दर्शाता है। यह सीट मुख्य रूप से दलित सशक्तिकरण, आरक्षण और स्थानीय विकास के मुद्दों पर केंद्रित रहती है। राजनीतिक परिदृश्य में महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) का पारंपरिक दलित और अल्पसंख्यक समर्थन मजबूत माना जाता है, लेकिन भाजपा ने केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से इस सीट में अपनी पकड़ मजबूत की है।
महत्वपूर्ण राजनीतिक मैदान है रोसड़ा
रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र अपने वामपंथी अतीत और वर्तमान में भाजपा के मजबूत प्रभाव के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मैदान है। यह सीट ऐसे इलाके का प्रतिनिधित्व करती है, जहां वामपंथ की पकड़ कमजोर हुई है और भाजपा ने अपनी स्थिति दृढ़ कर ली है। कांग्रेस और राजद के महागठबंधन के लिए इस चुनाव में रोसड़ा में वापसी करना चुनौतीपूर्ण होगा। उन्हें केवल भाजपा की मजबूत पकड़ को तोड़ना नहीं है, बल्कि दलित मतदाताओं के बिखरे हुए वोटों को एकजुट करना भी जरूरी होगा। रोसड़ा की आगामी राजनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या महागठबंधन दलित मतदाताओं के बीच अपनी विश्वसनीयता फिर से स्थापित कर पाता है या भाजपा, वीरेंद्र पासवान के नेतृत्व में, अपनी मजबूत जीत की लय को बरकरार रखती है।
