Mohiuddinnagar Assembly Election 2025: आखिर क्या है मोहिउद्दीननगर क्षेत्र का इतिहास? जानें इस विधानसभा सीट का समीकरण और बिहार चुनाव से जुड़े अपडेट

Mohiuddinnagar Assembly Election 2025: मोहिउद्दीननगर विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में हमेशा से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है और यह सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। यह क्षेत्र उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और चुनावों में अक्सर कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए जाना जाता है। मोहिउद्दीननगर की पहचान पूरी तरह से ग्रामीण क्षेत्र के रूप में है और यहां का राजनीतिक इतिहास 1952 से शुरू होता है।

Mohiuddinnagar Assembly Election 2025: बिहार के 243 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक, मोहिउद्दीननगर विधानसभा क्षेत्र, हमेशा ही राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यह सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है और उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। चुनावों में यह क्षेत्र अक्सर कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास 1952 में शुरू हुआ और स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस पार्टी का यहां काफी प्रभाव रहा। 1990 तक यह सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती थी। मोहिउद्दीननगर का पुराना नाम शहर धरहरा था, लेकिन यह नाम बदलकर सूफी संत शाह अफार मोहीउद्दीन के सम्मान में मोहिउद्दीननगर रख दिया गया। कहा जाता है कि शाह अफार मोहीउद्दीन, मध्यकालीन काल में चुनार के शाह कासिम सलमान के वंशज थे। इसके अलावा, यहां आमिना बीबी का किला भी मौजूद है, जिसे सूफी संत की पत्नी के नाम पर बनवाया गया था।

Mohiuddinnagar Assembly Election 2025

मोहिउद्दीननगर विधानसभा चुनाव 2025

कब होगी यहां वोटिंग?

मोहिउद्दीननगर विधानसभा क्षेत्र की एक खास विशेषता यह है कि यहां शहरी मतदाता बिल्कुल नहीं हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल मतदाता संख्या 264,479 थी। इस चुनाव के दौरान मोहिउद्दीननगर में कुल 385 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित होंगे। पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को संपन्न होगा। वोटों की गिनती 14 नवंबर को की जाएगी। मोहिउद्दीननगर में मतदान 6 नवंबर को पहले चरण में होगा।

राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर का गढ़

मोहिउद्दीननगर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर के लिए जाना जाता रहा है। यहां बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी और आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन के बीच मुकाबले आम रहे हैं। 1990 के बाद से किसी भी पार्टी ने लंबे समय तक इस सीट पर अपनी स्थायी पकड़ नहीं बनाई, जिससे यह साफ होता है कि यहां की जनता हर चुनाव में नए नेतृत्व को अवसर देने में संकोच नहीं करती। इस सीट पर बीजेपी के विधायक राजेश कुमार के लिए इसे बचाना और आरजेडी की पिछली विधायक एज्या यादव या अन्य प्रत्याशियों के लिए इसे जीतना हमेशा बड़ी चुनौती रही है।

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