Bihar Election 2025: सीमांचल की राजनीति में कसबा विधानसभा सीट पर सियासी तापमान बढ़ गया है। यह सीट पूर्णिया जिले की प्रमुख सामान्य श्रेणी की सीटों में गिनी जाती है। 2020 में जनता दल (यूनाइटेड) के विजय कुमार खेमका ने जीत दर्ज कर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले गठबंधन की पकड़ मजबूत की थी। लेकिन इस बार आरजेडी और कांग्रेस, दोनों इस सीट पर समीकरण बदलने के मूड में हैं।
पढ़ें कसबा विधानसभा सीट की क्या है राजनीतिक समीकरण।(फोटो सोर्स: टाइम्स नाउ डिजिटल)
2020 का चुनाव परिणाम और मौजूदा स्थिति
पिछले चुनाव में जेडीयू के विजय कुमार खेमका ने आरजेडी के उम्मीदवार को हराकर यह सीट अपने नाम की थी। उनके विकास कार्यों और संगठनात्मक पकड़ ने उन्हें स्थानीय स्तर पर मजबूत पहचान दी। हालांकि, विपक्ष इस बार जनता के बीच बेरोजगारी, सड़क और कृषि संबंधी मुद्दों को उभारने की रणनीति पर काम कर रहा है।
साल 2025 के उम्मीदवार
आगामी चुनाव में विजय कुमार खेमका (JD(U)) फिर से मैदान में उतर सकते हैं। आरजेडी से तैयब आलम का नाम चर्चा में है, जो पिछले चुनाव में भी मजबूत दावेदार थे। वहीं कांग्रेस भी सीमांचल में अपनी स्थिति सुधारने के लिए उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो सकता है।
स्थानीय मुद्दे और जनभावना
कसबा विधानसभा क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, सिंचाई और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति मतदाताओं के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। किसानों को समय पर खाद और बीज न मिलने, युवाओं में रोजगार की कमी और बाढ़ से जुड़ी समस्याओं पर लोगों में नाराजगी दिखती है। जेडीयू विकास कार्यों के दम पर फिर भरोसा मांग रही है, जबकि आरजेडी बदलाव के नारे के साथ मैदान में है।
समझें क्या है राजनीतिक समीकरण?
कसबा का राजनीतिक संतुलन जातीय और समुदाय आधारित वोटों पर टिका रहता है। यादव, ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका यहां निर्णायक होती है। अगर विपक्ष ने गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा तो यह सीट जेडीयू के लिए चुनौती बन सकती है।
2025 में कसबा विधानसभा का चुनाव पूरी तरह मुद्दों और छवि की लड़ाई होगा। विजय कुमार खेमका अपनी सीट बचाने में जुटे हैं, जबकि आरजेडी और कांग्रेस मिलकर उनके मुकाबले को कठिन बना सकती हैं।
