नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2025: अपने प्रतिष्ठित लिट्टी चोखा और कोमल मधुबनी कला से परे, बिहार लगातार खुद को नया रूप दे रहा है, बेचैन, युवा और महत्वाकांक्षाओं से भरा हुआ है। कवियों और राजनेताओं, संस्कृति और विरोधाभासों की यह भूमि एक बार फिर भारत की सबसे दिलचस्प राजनीतिक कहानी के केंद्र में है। लगभग 58% लोगों की उम्र 25 साल से कम होने के साथ, बिहार एक उभरती हुई पीढ़ी का घर है जो स्मार्टफोन और सपने दोनों को समान रूप से साथ लेकर चलती है। इसके एमएसएमई विकास की कहानी, 15 से अधिक उच्च-संभावित क्षेत्रों में 6 लाख से अधिक नौकरियां पैदा करना, एक शांत आर्थिक जागृति का संकेत है।
लिट्टी-चोखा से परे: इस चुनावी मौसम में टाइम्स नाउ दिखा रहा बिहार के कई रंग
ऑपरेशन सिंदूर और नए जीएसटी युग के बाद, यह गतिशील राज्य अब तक के सबसे निर्णायक चुनावों में से एक की ओर बढ़ रहा है, और चुनाव-पूर्व का उच्च-दांव वाला, जबरदस्त मुकाबला केंद्र में है। इसी परिप्रेक्ष्य में, टाइम्स नाउ और टाइम्स नाउ नवभारत अपने दर्शकों के लिए बिहार की नब्ज को पहले से कहीं अधिक गहराई से समझने वाली, संपादकीय रूप से सशक्त और आकर्षक कार्यक्रम श्रृंखला लेकर आ रहा है। यह चुनावी मौसम एक क्लासिक “डेविड बनाम गोलायथ” की कहानी जैसा तनाव अपने साथ लिए हुए है। क्या प्रशांत किशोर की स्लिंगशाट एनडीए की विशाल ताकत को चुनौती देने के लिए पर्याप्त साबित होगी? या फिर बिहार के पारंपरिक महागठबंधन समीकरण एक बार फिर वही पुरानी कहानी दोहराएंगे? बदलाव की फुसफुसाहटें जिलों तक गूंज रही हैं — और बिहार उस मोड़ पर खड़ा है, जहां अतीत की यादें नई राजनीतिक कहानियों से टकरा रही हैं।
इसकी अगुवाई कर रही है टाइम्स नाउ नवभारत और टाइम्स नाउ की ‘इलेक्शन यात्रा’, जो एक मोबाइल न्यूजरूम के रूप में 28 जिलों में 4,500 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। यह चलता-फिरता स्टूडियो मतदाताओं की असली भावनाओं को बिना किसी फिल्टर के सीधे जनता से देशभर तक पहुंचाएगा। पटना की चहल-पहल भरी गलियों से लेकर राघोपुर, हाजीपुर, नालंदा, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर और दरभंगा के दिल तक- टाइम्स नाउ नवभारत और टाइम्स नाउ की इलेक्शन यात्रा बिहार की आवाज को कैद करेगी, चुनावी नारों और वादों से आगे बढ़कर यह समझने की कोशिश करेगी कि राज्य के लोगों को वास्तव में क्या प्रेरित करता है।
मैंडेट 2025 के तहत, टाइम्स नाउ बिहार की सियासत के गहराई तक उतरने वाला कार्यक्रमों का विशेष लाइनअप लेकर आ रहा है।
‘नेशनल डिबेट’ में बिहार के अहम मुद्दों का बौद्धिक विश्लेषण और क्षेत्रीय दृष्टिकोण के साथ गहन विमर्श किया जाएगा। यह कार्यक्रम 11 अक्टूबर से हर शनिवार रात 8 बजे और रविवार दोपहर 3 बजे प्रसारित होगा।
‘इनसाइड’, एक डॉक्यूमेंट्री-शैली का वीकेंड स्पेशल शो, चुनावों को प्रभावित करने वाली राजनीतिक ताकतों और सामाजिक धाराओं की पड़ताल करेगा। यह भी 11 अक्टूबर से हर शनिवार और रविवार सुबह 11:30 बजे प्रसारित होगा।
इसके अलावा, ‘एक्सेस’ कार्यक्रम के जरिए टाइम्स नाउ प्रमुख प्रत्याशियों की चुनावी यात्रा को कवर करेगा, जिससे दर्शकों को प्रचार अभियान की हलचल के बीच उम्मीदवारों की अंदरूनी जानकारी और उनकी रणनीतियों की झलक मिलेगी।
टाइम्स नाउ नवभारत का मोबाइल हाइड्रोलिक कैंटर ऑन-ग्राउंड एक पूर्ण विकसित स्टूडियो में बदल जाता है। चैनल ने एक रणनीतिक रूप से डिजाइन किया गया प्रोग्राम लाइनअप पेश किया है, जो बिहार की धड़कन को कैप्चर करता है, क्योंकि राज्य ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है।
बाबुआ ई बिहार बा वर्तमान में हर रोज सुबह 11:30 बजे और शाम 7:30 बजे प्रसारित हो रहा है। ट्रैवलॉग स्टाइल का यह कार्यक्रम राज्य भर की यात्रा के अनुभव को दर्शाता है, स्थानीय लोगों से संवाद करता है और प्रामाणिक भाषाई आकर्षण बनाए रखता है।
इसके अलावा, रिपोर्टर बनाम रिपोर्टर सीजन 2 वापस लौट रहा है, जो हर कहानी के दोनों पक्षों को संतुलित, सटीक और निष्पक्ष सीधे बिहार के दिल से प्रस्तुत करता है।
व्यापक चुनावी कवरेज पर बात करते हुए टाइम्स नाउ और टाइम्स नाउ नवभारत की ग्रुप एडिटर-इन-चीफ नाविका कुमार ने कहा, “बिहार हमेशा से भारत में राजनीतिक आंदोलनों का केंद्र रहा है और यह वह प्रयोगशाला है जहां से राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय होती है। यह चुनाव ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद और विपक्ष के बहुचर्चित ‘वोट चोरी’ अभियान के बीच मतदाताओं के मूड की पहली बड़ी परीक्षा होगी। टाइम्स नाउ और टाइम्स नाउ नवभारत की टीमें जमीनी स्तर पर होंगी, यह जानने के लिए कि क्या प्रशांत किशोर जैसे नए खिलाड़ी कोई बदलाव की लहर ला पाएंगे या फिर मुकाबला एक बार फिर पारंपरिक एनडीए बनाम महागठबंधन तक ही सिमट जाएगा।”
व्यापक चुनावी कवरेज पर और प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “हमारी चुनावी प्रोग्रामिंग गहराई, पहुंच और विश्वसनीयता पर आधारित है। इलेक्शन यात्रा के माध्यम से न्यूजरूम को सीधे जमीन पर ले जाना, और नेशनल डिबेट जैसे प्रभावशाली फॉर्मेट्स से, हम केवल घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं कर रहे हैं - हम उन राजनीतिक परिदृश्य को उजागर कर रहे हैं, जो सामने आ रहे हैं। हमारा प्रयास यह है कि राजनीतिक संवाद को आम जनता के करीब लाया जाए और दर्शकों को सशक्त बनाया जाए ताकि वे मुद्दों, दांव-पेंच और हमारे लोकतंत्र के भविष्य को समझ सकें।”
जैसे-जैसे नवंबर नजदीक आ रहा है, चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं। टाइम्स नाउ और टाइम्स नाउ नवभारत का पोल ऑफ पोल्स / एग्जिट पोल 13 नवंबर को प्रस्तुत किया जाएगा, जो मतदाताओं के मूड और सीट प्रोजेक्शंस को बेजोड़ सटीकता के साथ सामने लाएगा। वहीं, भव्य समापन- मतगणना दिवस (14 नवंबर)-पूरे राज्य से मिनट दर मिनट अपडेट देने का वादा करता है, जहां हर संख्या केवल वोट नहीं बल्कि लोगों की आवाज भी दर्शाएगी। हाजीपुर की धूल भरी गलियों से लेकर पटना के विश्वविद्यालय परिसर तक, बिहार का लोकतंत्र उतना ही जमीनी है, जितना इसकी मिट्टी और उतना ही अप्रत्याशित जितनी इसकी राजनीति। यह आज के भारत के राजनीतिक रंगमंच की अभूतपूर्व गतिशीलता को प्रतिबिंबित करता है, और टाइम्स नाउ व टाइम्स नाउ नवभारत हर छोटे-बड़े पहलू को दर्शकों के सामने बेहद करीब और व्यक्तिगत रूप में पेश करने की अनूठी स्थिति में है।
