Araria Vidhan Sabha Seat: अररिया विधानसभा सीट बिहार की सीमावर्ती और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीटों में से एक है। यह अररिया लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और 1951 में इसकी स्थापना हुई थी। अब तक यहां 18 बार चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2009 का उपचुनाव भी शामिल है।
पढ़ें अररिया विधानसभा सीट का चुनावी समीकरण।(फोटो सोर्स: टाइम्स नाउ डिजिटल)
किस पार्टी ने कितनी बार मारी बाजी?
इस सीट पर कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व सबसे अधिक रहा है। पार्टी ने अब तक 7 बार जीत दर्ज की है। स्वतंत्र उम्मीदवारों ने 4 बार, भाजपा और लोजपा ने 2-2 बार, जबकि संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी और बिहार पीपुल्स पार्टी ने 1-1 बार जीत हासिल की है।
इन दो नेताओं के बीच महामुकाबला
बात करें इस विधानसभा चुनाव की तो यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस के सिटिंग विधायक आबिदुर्र रहमान और जदयू की शगुफ्ता अजीम के बीच ही माना जा रहा है।
पिछले चुनाव में भी दोनों आमने सामने थे। लेकिन इस बार के चुनावी मैदान में जनसुराज प्रत्याशी फरहत आरा बेगम और निर्दलीय शिवदीप लांडे इनकी राह में कांटे बन सकते हैं।
अररिया विधानसभा में 42 फीसदी आबादी मुस्लिम समुदाय की है। इसमें भी कुल्हैया जाति की आबादी कुल में आधे से अधिक है। जीत का सेहरा भी कुल्हैया जाति की प्रत्याशी के इर्द-गिर्द घूमता रहा है।
कांग्रेस को कड़ी चुनौती मिलने की संभावना
अररिया सीट की खासियत यह है कि यह शायद ही किसी एक पार्टी को लगातार दो बार मौका देती है। उदाहरण के लिए भाजपा ने 2005 में लगातार दो बार लोजपा ने 2009 व 2010 में और कांग्रेस ने 2015 व 2020 में जीत हासिल की। इस प्रवृत्ति के आधार पर 2025 में कांग्रेस को कड़ी चुनौती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अबिदुर रहमान ने बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने जदयू की शगुफ्ता अजीम को 47,936 वोटों के अंतर से हराया था। अबिदुर रहमान को कुल 1,03,054 (54.84%) वोट मिले, जबकि जदयू प्रत्याशी को 55,118 (29.33%) वोट प्राप्त हुए। एआईएमआईएम और लोजपा उम्मीदवारों को अपेक्षाकृत कम समर्थन मिला।
2024 लोकसभा चुनाव में अररिया विधानसभा क्षेत्र में राजद उम्मीदवार को 48,278 वोटों की बढ़त मिली थी, जो यह संकेत देता है कि महागठबंधन (INDI गठबंधन) का प्रभाव इस क्षेत्र में मजबूत बना हुआ है।
