Alwar Lok Sabha Constituency: राजस्थान की अलवर लोकसभा सीट पर स्थानीय बनाम बाहरी की लड़ाई दो यादवों के बीच दिख रही है। अलवर में लोकसभा चुनाव की जंग शायद राजस्थान में सबसे दिलचस्प चुनावी मुकाबला है। इस 'यादव बनाम यादव' लड़ाई में, भाजपा के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार ललित यादव से है। ललित यादव इस क्षेत्र के युवा विधायक हैं।
अलवर सीट पर कांग्रेस ने ललित यादव को बनाया है उम्मीदवार
अलवर सीट का समीकरण
उत्तर-पूर्व राजस्थान में स्थित अलवर हरियाणा की सीमा से सटा हुआ है और मेवात क्षेत्र का हिस्सा है, जो हाल के वर्षों में अक्सर गायों की हत्या के लिए सुर्खियों में रहा है। अलवर संसदीय क्षेत्र अपनी यादव आबादी के लिए जाना जाता है, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। पिछले दो आम चुनावों, 2014 और 2019 में यहां भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई है। 2019 के आम चुनावों में भाजपा उम्मीदवार बालक नाथ ने 1,060,201 वोटों के साथ जीत हासिल की, जबकि भंवर जितेंद्र सिंह को 1,30,230 वोट मिले। 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के महंत चांद नाथ ने कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह को 642,278 वोटों के साथ हराया था।
दोनों पार्टियों ने बदले उम्मीदवार
इस बार बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही अपने उम्मीदवार बदल दिए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस विधायक ललित यादव के खिलाफ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को मैदान में उतारा है।
विधानसभा का समीकरण
अलवर लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें भरोड़, मुंडावर, किशनगढ़ बास, तिजारा, अलवर शहर, अलवर ग्रामीण, रामगढ़ और राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ शामिल हैं। जिसमें से पांच पर कांग्रेस का कब्जा है और बाकी 3 पर बीजेपी का।
भूपेंद्र यादव पर बाहरी होने का आरोप
क्या भूपेंद्र यादव को बाहरी होने की वजह से नुकसान उठाना पड़ सकता है? क्या अलवर लोकसभा चुनाव में यादव समुदाय दो धड़ों में बंट जाएगा? कांग्रेस उम्मीदवार ललित यादव को स्थानीय समर्थन का फायदा मिल रहा है, जबकि भूपेंद्र यादव सिर्फ मोदी सरकार द्वारा पिछले दस सालों में किए गए कामों के आधार पर वोट मांग रहे हैं। अलवर लोकसभा क्षेत्र में यादव मतदाताओं के बाद मुस्लिम और एससी/एसटी समुदाय का नंबर आता है, जिसे कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता है।
