Higher Education: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों को डुअल, जॉइंट डिग्री और ट्विनिंग प्रोग्राम कराने की मंजूरी दे दी है। ऐसे में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी (IIT) और दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) समेत कई बड़े कॉलेज ने पिछले साल ही डुअल, ट्विनिंग और जॉइंट डिग्री शुरू करने की तैयारी कर दी है। इससे स्टूडेंट्स को न केवल क्वॉलिटी एजुकेशन मिलेगी बल्कि ग्लोबल एक्सपोजर का भी मौका मिलेगा।
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IIT बॉम्बे जापान की टोहोकु यूनिवर्सिटी के साथ जॉइंट एकेडमिक रिसर्च प्रोग्राम तैयार कर रही है। इसी तरह IIT चेन्नई भी पिछले साल जर्मनी की ड्रेसडेन यूनिवर्सिटी के साथ डुअल डिग्री शुरू करने के लिए काम कर रही है। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने भी डुअल डिग्री की शुरुआत कर दी है। वहीं, मुंबई यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल और एग्जिक्यूटिव काउंसिल ने भी डुअल, जॉइंट और ट्विनिंग डिग्री को मंजूरी दे दी है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर डुअल, जॉइंट डिग्री और ट्विनिंग प्रोग्राम में क्या अंतर होता है।
डुअल डिग्री प्रोग्राम
डुअल डिग्री प्रोग्राम के तहत एक भारतीय और एक विदेशी यूनिवर्सिटी मिलकर प्रोग्राम का करिकुलम तैयार करेंगे। हालांकि, इसमें दोनों यूनिवर्सिटी अलग-अलग डिग्री जारी करेंगे। स्टूडेंट को 30% कोर्स क्रेडिट फॉरेन इंस्टिट्यूट से पूरा करना होगा।
जॉइंट डिग्री प्रोग्राम
जॉइंट डिग्री प्रोग्राम के तहत एक भारतीय और एक विदेशी यूनिवर्सिटी मिलकर प्रोग्राम चलाएंगे। इसमें डिग्री भारतीय विवि की होगी। इसमें कम से कम 30-30 फीसदी क्रेडिट दोनों संस्थानों से हासिल करने होंगे।
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ट्विन प्रोग्राम
ट्विन प्रोग्राम के तहत स्टूडेंट को कुछ कोर्सेस के एक, दो या तीन सेमेस्टर की पढ़ाई विदेशी विश्वविद्यालय में जाकर करनी होगी। इस एक्सचेंज प्रोग्राम में कोर्स का 30 फीसदी क्रेडिट विदेशी विवि से लेना होगा।
