Vaibhav Sooryavanshi Mama IPS Abhishek Chauhan Success Story: संघ लोक सेवा आयोग के सिविल सेवा परीक्षा का रिजल्ट जारी हो (IPS Abhishek Chauhan Success Story) चुका है। हर बार की तरह इस भी यहां यूपी, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश का जलवा देखने को मिला है। यहां बिहार के कई अभ्यर्थियों को अच्छी रैंक के साथ कामयाबी (UPSC Motivational Success Story) मिली है। इस बीच समस्तीपुर जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो मेहनत, लगन, संघर्ष और जुनून की मिसाल बन गई है। जहां एक तरफ भांजा क्रिकेट के मैदान पर अपना लोहा मनवा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर मामा अभिषेक चौहान ने देश की सबसे कठिन परीक्षा में 102वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है।
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IPS Abhishek Chauhan Success Story: बिना कोचिंग के क्रैक किया यूपीएसस
अभिषेक चौहान बिहार के समस्तीपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। अभिषेक ने यूपीएससी की परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है। खास बात यह है कि अभिषेक ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद के सेल्फ स्टडी के दम पर आईएएस बन कमाल कर दिया है।
UPSC Motivational Success Story: IIT से गोल्ड मेडलिस्ट
बता दें अभिषेक चौहान की शुरुआती पढ़ाई आरके मिशन स्कूल पुरुलिया से हुई। इसके बाद उन्होंने गुरु वशिष्ठ स्कूल हाजीपुर से इंटरमीडिएट की परीक्षा पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने आईआईटी धनबाद का रुख किया। यहां से उन्होंने जियोलॉजी ब्रांच में एमटेक किया। पढ़ाई के दौरान उन्होंने यहां विश्वविद्यालय में टॉप करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया।
यूपीएससी की तैयारी के लिए छोड़ दी नौकरी
आईआईटी धनबाद से एमटेक करने के बाद उनका कैंपस सेलेक्शन एक मल्टीनेशनल कंपनी में हुआ। यहां उन्होंने करीब 6 महीने तक नौकरी की। लेकिन अपने सपने को साकार करने के लिए वह नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी में लग गए। खास बात यह है कि अभिषेक ने यूपीएससी के लिए किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। हालांकि इस दौरान उन्होंने कुछ विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लिया लेकिन सेल्फ स्टडी के जरिए ही अपनी पढ़ाई जारी रखी।
पहले अटेम्प्ट में क्रैक किया यूपीएससी
लगातार कड़ी मेहनत व संघर्ष के दम पर उन्होंने पहले अटेम्प्ट में साल 2025 में यूपीएससी क्रैक कर 102वीं रैंक हासिल कर ली है। बता दें अभिषेक के पिता प्रोफेसर अभय कुमार सिंह वर्तमान में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार हैं। अभिषेक की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो परिस्थितियों या सीमित संसाधनों को कारण बताकर अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं।
