USA Study Visa Rule for Indian Student: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा (Higher Education) प्राप्त करने का सबसे बड़ा और पसंदीदा केंद्र रहा है। यहां के विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय, बेस्ट रिसर्च सुविधाएं और वैश्विक करियर के अवसर हर साल हजारों भारतीय युवाओं को अमेरिका में पढ़ाई के लिए आकर्षित करते हैं। हालांकि, अमेरिका के किसी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना ही केवल काफी नहीं है। जी हां, वहां पढ़ाई करने का सपना आपका तब ही पूरा हो पाएगा, जब आपको वहां का स्टडी वीजा नहीं मिलता है। कई बार एडमिशन मिलने के बाद ही कई छात्रों का अमेरिका से शिक्षा प्राप्त करने का सपना केवल सपना ही रह जाता है। ऐसा आपके साथ न हो, इसलिए आपको पहले ही यूएस स्टडी वीजा (Student Visa) के बारे में पता होना चाहिए, ताकि आपको किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
USA Study Visa Rule for Indian Student (Photo - AI)
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अमेरिकी छात्र वीजा के प्रकार
अमेरिका में पढ़ाई के अपने सफर की शुरुआत करने से पहले हर भारतीय छात्र के वहां के वीजा प्रकार के बारे में जानना जरूरी है। जी हां, आपने सही समझा यहां स्टडी के लिए एक वीजा नहीं, बल्कि तीन प्रकार के हैं, जिसमें F-1, M-1 और J-1 वीजा शामिल है। आइए इसमें अंतर के बारे में बताएं -
F-1 Visa: यह सबसे आम और लोकप्रिय वीजा श्रेणी है। जो छात्र अमेरिका के किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज, यूनिवर्सिटी, प्राइवेट हाई स्कूल या लैंग्वेज ट्रेनिंग प्रोग्राम में फुल टाइम डिग्री या कोर्स करने जाते हैं, उन्हें F-1 वीजा दिया जाता है।
M-1 Visa: यह वीजा उन छात्रों के लिए होता है जो अमेरिका में किसी गैर-अकादमिक, व्यावसायिक (Vocational) या तकनीकी कोर्स में दाखिला लेते हैं।
J-1 Visa: यह एक एक्सचेंज विजिटर वीजा है। J-1 वीजा एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए होता है। यह उन छात्रों या रिसर्चर के लिए है जो किसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान या ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत अमेरिका जाते हैं।
वीजा के लिए क्या है आवेदन प्रक्रिया
अमेरिकी F-1 छात्र वीजा प्राप्त करने के लिए अभ्यर्थियों को निम्नलिखित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। आइए आपको उसके बारे में विस्तार से बताएं, ताकि आवेदन के दौरान किसी भी कमी के कारण आपका वीजा रिजेक्ट न हो सके।
SEVP स्वीकृति और Form I-20: सबसे पहले अभ्यर्थी का बता दें कि SEVP की फुल फॉर्म स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम है। इसके लिए मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में दाखिला होना जरूरी है। एडमिशन कन्फर्म होने के बाद संस्थान छात्र को Form I-20 (सर्टिफिकेट ऑफ एलिजिबिलिटी) जारी करता है।
SEVIS I-901 शुल्क का भुगतान: Form I-20 प्राप्त होने के बाद छात्र को आधिकारिक SEVP पोर्टल पर जाकर $350 (लगभग 29,000 रुपये) की SEVIS फीस भरनी होती है।
DS-160 फॉर्म भरना: अमेरिकी विदेश विभाग के पोर्टल पर DS-160 फॉर्म ध्यानपूर्वक भरें और उसकी कन्फर्मेशन स्लिप संभालकर रखें। इसकी आवेदन फीस $185 (लगभग 15,500 रुपये) होती है।
अपॉइंटमेंट बुक करना: फीस जमा करने के बाद अभ्यर्थी को दो अपॉइंटमेंट तय करने होते हैं—पहली बायोमेट्रिक (VAC) के लिए और दूसरी अमेरिकी कांसुलेट/दूतावास में वीजा इंटरव्यू के लिए।
कांसुलेट इंटरव्यू: अंतिम चरण में दूतावास में वीजा अधिकारी के साथ आमने-सामने का इंटरव्यू होता है, जहां अभ्यर्थी से पढ़ाई के उद्देश्य और उसके फाइनेंशियल बैकग्राउंड को लेकर सवाल पूछे जाते हैं।
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महत्वपूर्ण नियम और आवश्यकताएं
छात्र को यह साबित करना होता है कि उसके पास पहले वर्ष की ट्यूशन फीस और रहने-खाने का पूरा खर्च उठाने के लिए पर्याप्त फंड (बैंक बैलेंस, शिक्षा लोन या स्पॉन्सरशिप) उपलब्ध है। इसके साथ ही उन्हें इंटरव्यू के दौरान वीजा अधिकारी को यह आश्वस्त करना होता है कि उसकी प्राथमिकता पढ़ाई पूरी करना है और कोर्स समाप्त होने के बाद वह वापस अपने देश लौटेगा। F-1 वीजा धारक छात्र पढ़ाई के दौरान अपने पहले वर्ष में प्रति सप्ताह केवल 20 घंटे तक ऑन-कैंपस काम कर सकते हैं। डिग्री पूरी होने के बाद छात्र अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के लिए Optional Practical Training (OPT) के तहत 1 से 3 वर्ष तक अमेरिका में काम करने की अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।
अकेडमिक वर्ष की शुरुआत से पहले वीजा के लिए करें आवेदन
अमेरिका में पढ़ाई की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार, जिन्हें वहां एडमिशन मिल गया है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वह अपने शैक्षणिक सत्र शुरू होने से कम से कम 3 से 4 महीने पहले वीजा प्रक्रिया शुरू करें ताकि अंतिम समय में किसी तरह की देरी से बचा जा सके।
