UGC Guidelines for Private University: देश की प्राइवेट यूनिवर्सिटी को लेकर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) की तरफ से नया प्रेमवर्क तैयार किया गया है। जारी प्रेमवर्क के अनुसार, प्राइवेट यूनिवर्सिटी अब अपना ऑफ कैंपस तैयार कर सकते हैं। हायर एजुकेशन में छात्रों की मदद के लिए यूजीसी की तरफ से नई गाइडलाइंस जारी की गई है।
जानें ऑफ कैंपस से छात्रों को कैसे होगा फायदा
यूजीसी की 577वीं बैठक के बाद यूजीसी ने यह घोषणा की है। प्राइवेट यूनिवर्सिटी अब यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2003 के तहत ऑफ कैंपस तैयार कर सकती हैं। हालांकि, पांच साल पहले शुरू होने वाली यूनिवर्सिटी को अभी ये अधिकार नहीं मिला है। प्राइवेट यूनिवर्सिटी के ऑफ कैंपस से छात्रों को कैसे फायदा होने वाला है आइए आसान भाषा में समझते हैं।
Off Campus से छात्रों को होगा फायदा
यूजीसी रिकॉर्ड के अनुसार, देश में 471 प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं। यूजीसी की मंजूरी के बाद डीम्ड यूनिवर्सिटी भी अपना ऑफ कैंपस बना सकती हैं। इन यूनिवर्सिटी के ऑफ कैंपस से सीटें बढ़ने वाली हैं। यूनिवर्सिटी की ऑफ कैंपस सेंटर शुरू होने से सीटों में बढ़ोतरी होगी। साथ ही नए-नए कोर्स भी लॉन्च किए जाएंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मार्केटिंग और रोबोटिक्स जैसे कोर्स शामिल किए जा सकते हैं।
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यूजीसी की तरफ से जारी फ्रेमवर्क के अनुसार ऑफ कैंपस में भी पढ़ाई का स्तर मेन कैंपस की तरह ही होगा। ऑफ कैंपस में अच्छा काम करने से नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी NIRF Ranking और नेशनल एसेसमेंट ऐंड एक्रीडेशन काउंसिल (NAAC Ranking) में शामिल होने का मौका मिल सकता है।
क्या होनी चाहिए शर्तें?
स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत ऑफ कैंपस सेंटर शुरू करने के लिए यूनिवर्सिटी का मेन कैंपस कम से कम 5 साल पुराना होना चाहिए। ऑफ कैंपस के लिए जमीन पर यूनिवर्सिटी का अधिकार कम से कम तीस सालों के लिए होना चाहिए। ऑफ कैंपस शुरू करने से पहले यूनिवर्सिटी को अपना एकेडमिक विजन प्लान UGC को सौंपना होगा।
नए कोर्स, फैकल्टी की डिटेल्स, छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं और वित्तीय संसाधनों सभी का जिक्र होना जरूरी है। हायर एजुकेशन में लगातार हो रही बढ़ोतरी और प्रतियोगिता को ध्यान में रखते हुए यूजीसी की तरफ से नया फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।
